रीवा। त्योंथर में नवनिर्मित संयुक्त तहसील कार्यालय भवन का लोकार्पण गुरुवार को हो गया। क्षेत्रीय विकास की दिशा में मिली बड़ी उपलब्धि के बीच नेताओं एवं उनके समर्थकों में श्रेय लेने की होड़ और आपसी द्वंद का नजारा लोगों को देखने को मिला। मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक के समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के समर्थनमें न सिर्फ जमकर नारेबाजी की, बल्कि धक्का-मुक्की की स्थिति निर्मित हो गई थी। स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
त्योंथर जिला बनेः सिद्धार्थ
तहसील भवन के लोकार्पण कार्यक्रम के पश्चात् मीडिया से मुखातिब हुए विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने संयुक्त तहसील कार्यालय भवन की सौगात के लिए मुयमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि त्योथर को जिला बनाया जाए, यह मेरी मांग है। उन्होंने कहा कि त्योंथर जिला बने यह मेरा त्योथर क्षेत्र के प्रति समर्पण, स्वार्थ और लालच है। क्षेत्रीय विकास के हो रहे कार्यों के लिए उन्होंने मुयमंत्री को हृदय से आभार ज्ञापित किया।
त्योंथर की भाजपाई राजनीति में आपसी तल्खी कोई नई बात नहीं है, यह तल्खी मौके-मौके पर खुलकर सामने आती रहती है। जहां क्षेत्रीय विधायक सिद्धार्थ तिवारी राज द्वारा त्योंथर के विकास में एक नया आयाम जुडऩे पर राज्य सरकार की प्रशंसा में कसीदे पढ़े गए वहीं पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी अपेक्षित समान न मिलने से नाराज दिखे। पूर्व विधायक का दर्द मीडिया के सामने छलके बिना नहीं रह सका। सांसद जनार्दन मिश्र और कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी की मौजूदगी में उभय पक्ष के समर्थकों द्वारा अपने-अपने नेताओं के समर्थन में गला फाड़ नारे लगाए गए। समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इसे नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई कहना अनुचित नहीं होगा। बताया जाता है कि पूर्व विधायक की नाराजगी उनको लोकार्पण समारोह में आमंत्रित नहीं किए जाने, शिलापट्ट पर नाम न होने, पूजन के दौरान एवं मंच पर अपेक्षित स्थान नहीं मिलने, को लेकर थी। सांसद की समझाइश पर वातावरण शांत हुआ।

दोनों शिला पट्टिकाएं लगाई गईं
पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी ने मीडिया को बताया कि तहसील भवन का भूमिपूजन उनके विधायक कार्यकाल में हुआ था जिसकी शिलापट्टिका भवन में लगाने से रोका गया। जब बात मुख्यमंत्री तक पहुंची तब ठेकेदार द्वारा पुरानी शिलापट्टिका लगाई गई। उन्होंने कहा कि त्योंथर की जनता ने उन्हें पराजित नहीं किया है बल्कि किसी कारणवश उन्हें अवसर नहीं मिला, इसका यह मतलब नहीं है कि मैं त्योंथर छोडक़र भाग जाऊंगा।

बताते हैं कि लोकार्पण अवसर पर पूजन कार्यक्रम था जिसमें पूर्व विधायक को जगह नहीं मिली। इसी प्रकार मंच पर उनके लिए कुर्सी नहीं थी। बाद में कुर्सी लगवाई गई। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि रीवा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी पूर्व विधायकों को स्थान दिया जाता है, कुर्सी में नाम की चिट चस्पा की जाती है। यहां अपमान होने की बात उन्होंने कही। इतना ही नहीं पूर्व विधायक ने यहां तक कहा कि जिन दिवंगत नेताओं की दुहाई दी जाती है उनके शासनकाल में या स्थिति थी, किसी से छिपी नहीं है। बताते हैं कि भवन लोकार्पण की जो नई शिलापट्टिका लगाई गई है, उसमें पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी का नाम नहीं है।
