रीवा। जिले में निजी स्कूलों को मान्यता प्रदान करने की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गड़रिया स्थित एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल की मान्यता पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) द्वारा की गई संयुक्त जांच में विद्यालय में कई गंभीर कमियां सामने आने का दावा किया गया है। जांच के बाद स्कूल संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर अभिलेखों सहित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यालय को आठवीं कक्षा तक संचालन की मान्यता प्राप्त है, जबकि जांच के दौरान मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों और मौके पर उपलब्ध सुविधाओं के बीच अंतर पाया गया। इसके साथ ही मान्यता प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीईओ और डीपीसी की संयुक्त जांच में सामने आईं खामियां
जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को डीईओ और डीपीसी की संयुक्त टीम ने गड़रिया स्थित एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान विद्यालय में उपलब्ध कक्षों, शिक्षकों, खेल मैदान, लाइब्रेरी और अन्य आवश्यक सुविधाओं का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर है। इसी आधार पर स्कूल संचालक को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि निर्धारित मानकों की पूर्ति नहीं करने और वरिष्ठ कार्यालय को कथित रूप से भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के मामले में विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई क्यों न प्रस्तावित की जाए।
न शिक्षक पूरे, न खेल मैदान और न ही लाइब्रेरी
संयुक्त जांच में विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर कई कमियां सामने आईं। जारी नोटिस में दर्ज तथ्यों के अनुसार विद्यालय के पास स्वयं का निर्धारित खेल मैदान उपलब्ध नहीं पाया गया। मकान मालिक के घर के सामने स्थित खाली जगह को खेल मैदान के रूप में दर्शाया गया था।
इसके अलावा विद्यालय में लाइब्रेरी, प्राचार्य कक्ष और स्टाफ रूम भी उपलब्ध नहीं पाए गए। मान्यता संबंधी दस्तावेजों में 11 कक्ष दर्शाए गए थे, जबकि मौके पर केवल पांच कक्ष ही उपलब्ध मिले। जांच में यह भी पाया गया कि कक्षों के भीतर प्लाईवुड के माध्यम से पार्टीशन किया गया है।
शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी अंतर सामने आया। विद्यालय की उपस्थिति पंजी में सात शिक्षकों के नाम दर्ज थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान केवल पांच शिक्षक ही उपस्थित मिले। इससे विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
स्थानीय लोगों ने विद्यालय में अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था और दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब विद्यालय की मान्यता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था, तब भौतिक सत्यापन के दौरान इन कमियों पर आपत्ति क्यों नहीं की गई?
नियमानुसार मान्यता प्रक्रिया में विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं, भवन, कक्षों, शिक्षकों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि निरीक्षण के समय वास्तविक स्थिति दस्तावेजों से अलग थी, तो संबंधित सत्यापन रिपोर्ट की निष्पक्षता की जांच भी आवश्यक हो जाती है।
यही वजह है कि अब बीआरसीसी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर किस आधार पर विद्यालय की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और किन परिस्थितियों में मान्यता की अनुशंसा की गई? इन सवालों का जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकता है।
तीन दिन में जवाब, मान्यता निरस्तीकरण की कार्रवाई संभव
डीईओ एवं डीपीसी के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी नोटिस में स्कूल संचालक को तीन दिवस के भीतर अपना प्रतिवाद उत्तर आवश्यक अभिलेखों के साथ प्रस्तुत करने को कहा गया है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा में जवाब प्राप्त नहीं होने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एकपक्षीय कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है। इसमें आरटीई के प्रावधानों के तहत विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
डीपीसी और बीआरसीसी की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में केवल विद्यालय संचालक ही नहीं, बल्कि मान्यता प्रक्रिया से जुड़े विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हो गई है। प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी होने के नाते संबंधित बीआरसीसी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
उन्हें भी तीन दिवस के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना है। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत अभी अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।
बताया गया है कि संबंधित मान्यता का मामला वर्ष 2025 का है। ऐसे में यह जांच केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जिले में निजी विद्यालयों को प्रदान की गई मान्यताओं और उनके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
छात्रों के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण सवाल
विद्यालय की मान्यता को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच सबसे महत्वपूर्ण विषय वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य है। यदि जांच के बाद मान्यता निरस्त करने का निर्णय लिया जाता है तो विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।
शिक्षा व्यवस्था में नियमों का पालन जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का नुकसान विद्यार्थियों को न उठाना पड़े।
डीईओ डॉ. पी.एल. मिश्रा ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पी.एल. मिश्रा के अनुसार, स्कूल संचालक और प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी होने के नाते संबंधित बीआरसीसी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। निर्धारित समयसीमा में जवाब प्राप्त नहीं होने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मान्यता की निर्धारित शर्तों की अनदेखी करना उचित नहीं है।
फिलहाल एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल की मान्यता को लेकर विभागीय जांच जारी है। अब सबकी निगाहें स्कूल संचालक और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हैं। तीन दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
