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श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में पार्किंग टेंडर फिक्सिंग का मामला उजागर

Published: March 29, 2025

रीवा जिले के श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, गांधी स्मारक चिकित्सालय, और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में वाहन पार्किंग स्टैंड के टेंडर में बड़े पैमाने पर फिक्सिंग का मामला सामने आया है। यह घोटाला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी दर्शाता है। इस मामले में निविदाकार मेसर्स हॉलीबुड मोबाइल शॉप के मालिक वरिश चंद त्रिपाठी को एकतरफा लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है, जिसमें श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता, संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक, और टेंडर बिड खोलने के लिए गठित पांच सदस्यीय टीम की संलिप्तता सामने आई है। इस पूरे प्रकरण में न केवल टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं, बल्कि जीएसटी चोरी के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी का भी खुलासा हुआ है।

टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता

सूत्रों के अनुसार, श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, गांधी स्मारक चिकित्सालय, और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में पार्किंग व्यवस्था के लिए जारी टेंडर में शुरू से ही फिक्सिंग की बू आ रही थी। टेंडर बिड खोलने के लिए गठित पांच सदस्यीय टीम पर आरोप है कि उसने मेसर्स हॉली बुड मोबाइल शॉप के मालिक वरिश चंद त्रिपाठी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। टीम ने न तो दस्तावेजों की सही तरीके से जांच की और न ही टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती। हैरानी की बात यह है कि वरिश चंद त्रिपाठी ने तीन बार टेंडर डाले और हर बार उनके सभी दस्तावेज सही पाए गए, जबकि बाद में जांच में इन दस्तावेजों में भारी गड़बड़ियां सामने आईं।

बंद जीएसटी नंबर से काम और चोरी का खेल

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वरिश चंद त्रिपाठी ने अपनी फर्म “वरिश चंद त्रिपाठी वाहन सुरक्षा व्यवस्था” के नाम से स्थापना पंजीयन कराया था, लेकिन टेंडर में मेसर्स हॉलीबुड मोबाइल शॉप के बंद जीएसटी नंबर को संलग्न किया। जानकारी के मुताबिक, यह जीएसटी नंबर साल 2020 में ही बंद हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद फरवरी 2022 से लगातार पार्किंग का काम इसी बंद जीएसटी के आधार पर किया जा रहा है। इस दौरान वरिश चंद त्रिपाठी ने करोड़ों रुपये का काम किया, लेकिन जीएसटी के नाम पर एक भी पैसा जमा नहीं किया। अनुमान है कि अब तक 50 लाख रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी हो चुकी है, जो सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रही है।

प्रशासन की मिलीभगत और लापरवाही

इस पूरे घोटाले में श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने न केवल टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं को नजरअंदाज किया, बल्कि वरिश चंद त्रिपाठी को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर दस्तावेजों की जांच में ढिलाई बरती। पांच सदस्यीय टीम, जो टेंडर बिड खोलने और उसकी वैधानिकता जांचने के लिए जिम्मेदार थी, ने भी इस फिक्सिंग में अहम भूमिका निभाई। सूत्रों का कहना है कि टीम ने वरिश चंद त्रिपाठी के पक्ष में फैसला सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजों की औपचारिक जांच तक नहीं की।

पार्किंग टेंडर

श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, गांधी स्मारक चिकित्सालय, और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं। इन संस्थानों में वाहन पार्किंग की व्यवस्था न केवल सुविधा का मामला है, बल्कि यह अस्पताल के राजस्व का भी एक बड़ा स्रोत है। टेंडर फिक्सिंग के कारण न केवल यह राजस्व निजी हाथों में चला गया, बल्कि जीएसटी चोरी के जरिए सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हुआ। आम जनता और मरीजों को इस अनियमितता की कीमत चुकानी पड़ रही है, क्योंकि पार्किंग व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जीएसटी चोरी का बड़ा खेल

वरिश चंद त्रिपाठी और उनकी फर्म मेसर्स हॉलीबुड मोबाइल शॉप ने बंद जीएसटी नंबर के आधार पर न केवल पार्किंग का ठेका हासिल किया, बल्कि इसके जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी भी की। फरवरी 2022 से अब तक इस फर्म ने पार्किंग से होने वाली आय को अपने खाते में डाला, लेकिन जीएसटी के नाम पर एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राशि 50 लाख रुपये से कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि पार्किंग से होने वाली आय का कोई हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया गया। यह मामला न केवल जीएसटी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी धन की लूट का भी गंभीर उदाहरण है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

इस घोटाले के उजागर होने के बाद स्थानीय लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ टेंडर फिक्सिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार, लापरवाही, और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पूरी कहानी छिपी है। लोगों का यह भी आरोप है कि श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारी इस फिक्सिंग में सीधे तौर पर शामिल हैं, और उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

प्रशासन का मौन और आगे की जांच

फिलहाल, इस मामले में श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। टेंडर बिड खोलने वाली पांच सदस्यीय टीम भी चुप्पी साधे हुए है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस मामले की शिकायत जीएसटी विभाग के  उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है और इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और बंद जीएसटी नंबर से काम करने वाली फर्म के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

रीवा के श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, गांधी स्मारक चिकित्सालय, और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में वाहन पार्किंग टेंडर फिक्सिंग का यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार का एक और नमूना है। वरिश चंद त्रिपाठी और उनकी फर्म मेसर्स हॉली बुड मोबाइल शॉप को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए न केवल नियमों को तोड़ा गया, बल्कि जीएसटी चोरी के जरिए सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस घोटाले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव में सरकारी तंत्र किस तरह निजी हितों का शिकार बन जाता है। अब यह देखना बाकी है कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित जनता को न्याय मिल पाता है।

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