नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर अपने खास पहनावे से सभी का ध्यान आकर्षित किया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में पीएम मोदी लगातार 13वीं बार देश को संबोधित करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक लाल रंग की टाई-एंड-डाई यानी बांधेज पगड़ी पहनी, जो राजस्थान और गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है।
प्रधानमंत्री ने सफेद कुर्ते के साथ चॉकलेट ब्राउन रंग की वेस्ट यानी जैकेट पहनी थी। उनकी पोशाक को खास बना रहा था तिरंगे रंगों वाला पॉकेट स्क्वायर, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंगों का संयोजन नजर आया। पगड़ी की पारंपरिक शैली और रंगों ने उनके पूरे व्यक्तित्व को आकर्षक और गरिमामय बना दिया।
राजस्थानी और गुजराती संस्कृति की झलक
पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस समारोह के परिधानों में भारतीय संस्कृति, क्षेत्रीय परंपराओं और रंगों की विविधता की झलक देखने को मिलती है। उनकी पगड़ियां हर वर्ष अलग शैली, रंग और डिजाइन के साथ सामने आती हैं। यही वजह है कि लाल किले से उनके संबोधन के साथ-साथ उनके पहनावे को लेकर भी लोगों में खास दिलचस्पी रहती है।
पिछले वर्ष, 2025 में प्रधानमंत्री ने नारंगी, पीले और हरे रंगों की झलक वाली चमकदार राजस्थानी लहरिया पगड़ी पहनी थी। वर्ष 2023 में उन्होंने पीले, हरे और लाल रंगों के शेड्स वाली बांधनी प्रिंट पगड़ी को काली वी-नेक जैकेट के साथ पहना था। वहीं, 2022 में उनकी पसंद केसरिया रंग की पगड़ी थी, जिसमें लाल मोटिफ और लहराती हुई पूंछ दिखाई दे रही थी।
हर साल अलग रंग और शैली
वर्ष 2021 में पीएम मोदी क्रीम और केसरिया रंग की पगड़ी में नजर आए थे। इसके एक वर्ष पहले, 2020 में कोविड-19 महामारी के बीच उन्होंने केसरिया बॉर्डर वाले सफेद स्कार्फ से अपना चेहरा ढका था। यह पहनावा उस समय की परिस्थितियों और सावधानी का प्रतीक भी बना।
प्रधानमंत्री बनने के बाद वर्ष 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान उन्होंने गहरे लाल रंग की जोधपुरी बांधेज पगड़ी पहनी थी। इसके बाद 2015 में उन्होंने पीली और बहुरंगी क्रिस-क्रॉस डिजाइन वाली पगड़ी पहनी। वर्ष 2016 की गुलाबी-पीली टाई-एंड-डाई पगड़ी, 2017 की गहरे लाल-पीले रंग की पगड़ी और 2018 की विशेष केसरिया पगड़ी ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं।
पीएम मोदी का यह अंदाज भारतीय परंपराओं, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय संस्कृतियों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उनकी पगड़ियां स्वतंत्रता दिवस समारोह की पहचान बन चुकी हैं और हर वर्ष देशभर में उनके नए लुक की चर्चा होती है।
