नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना भारत की “गलत सोच” का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम उपभोक्ताओं के ईंधन खर्च पर पड़ता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के लिए किसी एक देश या सीमित बाहरी स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने स्वदेशी उत्पादन, वैकल्पिक ईंधन, जैव ईंधन, हरित ऊर्जा और तकनीकी नवाचार को आत्मनिर्भर भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया।
प्रधानमंत्री ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका संदेश था कि ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव केवल सरकार की नीतियों से संभव नहीं होगा, बल्कि इसमें उद्योग, किसान, वैज्ञानिक, युवा और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने से भारत को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही घरेलू ऊर्जा उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन क्षेत्र में निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा संक्रमण एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और परिवहन क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए निकट अवधि में आयातित तेल की भूमिका बनी रहेगी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आत्मनिर्भरता को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, विनिर्माण और तकनीक सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। स्वतंत्रता दिवस के मंच से दिया गया यह संदेश सरकार की उस नीति-दिशा को रेखांकित करता है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ रणनीतिक स्वायत्तता पर भी जोर दिया जा रहा है।
लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रमुख हिस्सा रहा। सरकारी सूचना के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने देश का नेतृत्व किया और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़े विषयों पर बात की। स्वतंत्रता दिवस 2026 की लाइव कवरेज में ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मुद्दा इसलिए भी प्रमुख रहा, क्योंकि कच्चे तेल की कीमत और आपूर्ति से जुड़े वैश्विक घटनाक्रम का असर भारत की आर्थिक नीतियों पर लगातार पड़ता है।
