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पाकिस्तान में सियासी संकट: सेना का दबदबा, सरकार पर तख्तापलट का खतरा

Published: May 9, 2025

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान को सैन्य और राजनीतिक रूप से हिलाकर रख दिया है। इस ऑपरेशन ने न केवल पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को निशाना बनाया, बल्कि वहां के सियासी नेतृत्व और सेना के बीच गहरे मतभेद को भी उजागर कर दिया। पाकिस्तानी सेना, विशेष रूप से सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर लगातार दबाव बना रही है। सूत्रों के अनुसार, सेना का यह रवैया तख्तापलट की जमीन तैयार करने की ओर इशारा करता है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों पर सेना का अविश्वास और उनके खिलाफ खुली नाराजगी ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अपने भाई शहबाज से मुलाकात ने सियासी हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की बौखलाहट
7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत के इस हमले ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को सकते में डाल दिया। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर 8 मई को जम्मू, पठानकोट और उधमपुर सहित भारत के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले की कोशिश की, लेकिन भारत की S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को नाकाम कर दिया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के हमले को “युद्ध की कार्रवाई” करार देते हुए “हर बूंद खून का बदला” लेने की बात कही। हालांकि, उनकी यह बयानबाजी जनता में खराब छवि बना रही है, क्योंकि सेना की आक्रामकता के सामने सरकार कमजोर नजर आ रही है।

सेना और सरकार में तनातनी
पाकिस्तान में सेना का सियासी मामलों में दखल कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह है कि जब भी सियासी नेतृत्व और सेना में मतभेद उभरे, सेना ने तख्तापलट का रास्ता चुना। 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार को अपदस्थ कर सत्ता हथिया ली थी। वर्तमान स्थिति में भी जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना सरकार पर हावी होती दिख रही है।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों ने सेना के गुस्से को और भड़का दिया। पहलगाम हमले के बाद एक साक्षात्कार में आसिफ ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने अतीत में आतंकी संगठनों को समर्थन दिया। इस बयान पर जनरल मुनीर ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री शहबाज के सामने आसिफ को फटकार लगाई। इसके बाद आसिफ ने एक और विवादास्पद दावा किया कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पांच भारतीय जेट विमान मार गिराए, लेकिन जब CNN ने उनसे सबूत मांगे, तो वे केवल “सोशल मीडिया” का हवाला दे पाए, जिससे उनकी और पाकिस्तान की किरकिरी हुई।

सेना ने आसिफ के उस बयान को भी चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भारत तनாவ नहीं बढ़ाएगा, तो पाकिस्तान कोई गैर-जिम्मेदाराना कदम नहीं उठाएगा। बुधवार रात भारत के 15 शहरों पर हमले की नाकाम कोशिश ने इस बयान को झूठा साबित कर दिया।

सेना की दोहरी चाल
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर वह भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है, दूसरी ओर सियासी नेतृत्व को शांति और तनाव कम करने की बात कहने के लिए मजबूर कर रही है। इससे जनता में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है, जो सेना के लिए तख्तापलट का मौका बन सकता है। जनरल मुनीर ने हाल ही में एक सैन्य अभ्यास के दौरान टैंक पर चढ़कर भारत के किसी भी “सैन्य दुस्साहस” का “तेज जवाब” देने की बात कही थी, जिससे उनकी आक्रामक छवि और मजबूत हुई।

इसके अलावा, सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में डालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। खान ने फरवरी में जनरल मुनीर को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन नीतियों की समीक्षा की मांग की थी, जिसे सेना ने नजरअंदाज कर दिया।

नवाज शरीफ की वापसी और सियासी समीकरण
इन तनावों के बीच, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 8 मई को अपने भाई शहबाज से इस्लामाबाद में मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि नवाज को भारत के साथ बातचीत के लिए एक संभावित चेहरा माना जाता है। 1999 में करगिल युद्ध के बाद नवाज ने अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से मुलाकात कर तनाव कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, मौजूदा हालात में भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की संभावना कम ही दिखती है।

कुछ जानकारों का मानना है कि नवाज की यह मुलाकात सियासी एकजुटता दिखाने की कोशिश हो सकती है, ताकि सेना के बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। शहबाज और नवाज की एकता ने 1999 में भी मुशर्रफ के सत्ता हथियाने के प्रयास को कुछ समय के लिए रोका था।

तख्तापलट का खतरा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पाकिस्तान का इतिहास सेना के तख्तापलटों से भरा पड़ा है। 1958, 1977, और 1999 में सेना ने सत्ता पर कब्जा किया। वर्तमान में जनरल मुनीर की आक्रामकता और सरकार के कमजोर प्रदर्शन ने तख्तापलट की आशंकाओं को और मजबूत किया है। कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया है कि भारत के डर से पाकिस्तानी सेना में हजारों सैनिकों और अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है, हालांकि ये दावे पुष्ट नहीं हैं।
इसके अलावा, एक अन्य X पोस्ट में कहा गया कि जनरल मुनीर को हिरासत में लिया गया है और लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को नया सेनाध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सियासी और सैन्य संकट चरम पर है। सेना का सरकार पर बढ़ता दबाव, रक्षा मंत्री की कमजोर स्थिति, और शरीफ बंधुओं की मुलाकात ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जनरल मुनीर की आक्रामकता और सेना की दोहरी रणनीति से तख्तापलट का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर, भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी। ऐसे में पाकिस्तान के सियासी नेतृत्व के सामने न केवल भारत से निपटने की चुनौती है, बल्कि अपनी ही सेना के दबदबे को संतुलित करने की भी जरूरत है।

 

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