प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच जारी विवाद अब गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार देर रात कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शंकराचार्य के शिविर में जबरन घुसने की कोशिश और धक्का-मुक्की से माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हालात को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रस्तावित गो-प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा को रद्द करने का फैसला लिया है।
शिविर में घुसने की कोशिश, 15 मिनट तक हंगामा
शनिवार रात करीब 10 से 15 युवक भगवा झंडा लेकर शंकराचार्य के शिविर के पास पहुंचे। बताया जा रहा है कि ये युवक ‘कट्टर सनातनी सेना’ नामक संगठन से जुड़े थे। उन्होंने “आई लव बुलडोजर” और “CM योगी जिंदाबाद” जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए और शिविर में जबरन घुसने की कोशिश की।
आधी रात मीडिया और पुलिस के सामने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के शिविर में हमला!
लाठियाँ लेकर लेकर शिविर में घुसे गुंडे!
ईश्वर रक्षा करें।
@jyotirmathah pic.twitter.com/mxu0mQMFVz— Deepak Singh दीपक सिंह (@DeepakSinghINC) January 24, 2026
इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और सेवकों के साथ धक्का-मुक्की हुई। करीब 15 मिनट तक हंगामा चलता रहा, जिससे शिविर में अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख शिष्यों ने शिविर को चारों ओर से ढंक दिया और अंदर जाने के रास्ते बंद कर दिए।
संगठन प्रमुख पर शक, सुरक्षा घेरा कड़ा
सूत्रों के मुताबिक, इस समूह का नेतृत्व सचिन सिंह नाम का व्यक्ति कर रहा था। घटना के बाद शंकराचार्य के अनुयायियों ने सतर्कता बढ़ा दी और शिविर के चारों ओर अतिरिक्त सुरक्षा घेरा बना दिया गया।
शिविर के अंदर जाने वाले सभी रास्तों पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो सके। समर्थकों का कहना है कि अगर समय रहते स्थिति नहीं संभाली जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
थाने में शिकायत, गंभीर आरोप
शिविर प्रभारी की ओर से स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व लाठी-डंडे और झंडे लेकर पहुंचे थे और जबरन शिविर में घुसकर मारपीट करने पर उतारू थे।

शिकायत में यह भी कहा गया कि अगर सेवकों ने समय रहते हस्तक्षेप न किया होता, तो स्थिति और भयावह हो सकती थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
शंकराचार्य की सुरक्षा पर चिंता
शिविर के बाहर अक्सर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुले स्थान पर बैठते हैं और श्रद्धालुओं से संवाद करते हैं। ऐसे में समर्थकों ने आशंका जताई है कि अगर दोबारा इस तरह की घटना होती है, तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।
अनुयायियों ने प्रशासन से मांग की है कि शंकराचार्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और शिविर के आसपास स्थायी पुलिस बल तैनात किया जाए।
गो-प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा रद्द
घटना के बाद तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रस्तावित गो-प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा को रद्द कर दिया है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि मौजूदा हालात में यात्रा निकालना सुरक्षित नहीं था।
उन्होंने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील भी की है।
मौनी अमावस्या विवाद से जुड़ा है मामला
यह पहला मौका नहीं है जब अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव हुआ हो। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन जब वे पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोक दिया था और पैदल जाने को कहा था। इस दौरान उनके शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई थी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के शिविर में योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद, बुलडोजर बाबा जिंदाबाद का नारा लगाते हुए कुछ गुंडे और असामाजिक तत्व एवं प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिसवाले पहुंच गए एवं शंकराचार्य जी को मारने का प्रयास किया गया है।
जैसा कि शंकराचार्य जी ने इस बात की आशंका पहले… pic.twitter.com/knwy75mrFX
— Samajwadi Party Media Cell (@mediacellsp) January 24, 2026
इसके बाद नाराज होकर वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने उन्हें 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए थे—एक शंकराचार्य की पदवी को लेकर और दूसरा मौनी अमावस्या की घटना को लेकर।
प्रशासन की चेतावनी और जवाब
मेला प्रशासन ने पहले चेतावनी दी थी कि उन्हें माघ मेले से स्थायी रूप से बैन भी किया जा सकता है। हालांकि अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का लिखित जवाब भेज दिया था।
इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और अब ताजा घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में हुई घुसपैठ और धक्का-मुक्की की घटना ने माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार जारी विवाद, नोटिस और अब यह हंगामा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में जरूरत है कि हालात को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जाए और शंकराचार्य सहित सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि माघ मेले की धार्मिक गरिमा बनी रहे।
