प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इज़राइल यात्रा के दूसरे दिन एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया। जब पीएम मोदी इज़रायली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) को संबोधित करने के लिए मंच पर पहुँचे, तो सदन के भीतर भारी हंगामा शुरू हो गया। इज़राइल के विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न केवल नारेबाजी की, बल्कि सदन से वॉकआउट भी कर दिया।
यह घटना उस समय हुई जब पीएम मोदी को सम्मान देने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था। इज़रायली लोकतंत्र में आंतरिक राजनीतिक मतभेदों का असर इस कूटनीतिक कार्यक्रम पर भी देखने को मिला।
विपक्ष का विरोध और नारेबाजी
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपना संबोधन शुरू करने की तैयारी की, इज़राइल के विपक्षी नेता और उनके समर्थक सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए। विपक्षी सांसदों ने नेतन्याहू सरकार की आंतरिक नीतियों और हालिया विधायी बदलावों के विरोध में पोस्टर दिखाए और नारेबाजी की। विपक्षी नेताओं का आरोप था कि नेतन्याहू सरकार विदेशी मेहमानों की आड़ में अपनी घरेलू विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।
हंगामे के बीच, कुछ सांसदों ने “लोकतंत्र बचाओ” के नारे लगाए और देखते ही देखते सदन के एक बड़े हिस्से ने पीएम मोदी के भाषण शुरू होने से ठीक पहले वॉकआउट कर दिया।
पीएम मोदी और नेतन्याहू की प्रतिक्रिया
सदन में मचे इस शोर-शराबे के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शांत नजर आए। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और विपक्ष के इस व्यवहार को “अशोभनीय” करार दिया। नेतन्याहू ने कहा कि विपक्ष ने भारत जैसे महान मित्र राष्ट्र के सम्मान में बाधा डालकर इज़राइल की परंपरा को ठेस पहुँचाई है।
विपक्ष के बाहर जाने के बाद, पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने इज़राइल को भारत का एक “अटूट साथी” बताते हुए आतंकवाद, तकनीक और नवाचार पर जोर दिया।
विशेषज्ञों की राय: कूटनीति बनाम घरेलू राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध सीधे तौर पर पीएम मोदी या भारत के खिलाफ नहीं था, बल्कि इज़राइल की अपनी घरेलू राजनीति और नेतन्याहू के खिलाफ गुस्से का नतीजा था। इज़राइल पिछले काफी समय से आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और न्यायिक सुधारों को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। विपक्षी दलों ने इस वैश्विक मंच का उपयोग अपनी बात रखने के लिए एक अवसर के रूप में किया।
कूटनीतिक संबंधों पर असर नहीं
नेसेट में हुए इस हंगामे के बावजूद, भारत और इज़राइल के बीच होने वाले रणनीतिक समझौतों पर कोई असर नहीं पड़ा है। दोनों देशों ने रक्षा, कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इज़रायली संसद में हुआ यह वॉकआउट वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है, क्योंकि यह भारत के किसी प्रधानमंत्री के पहले नेसेट संबोधन के दौरान हुई एक दुर्लभ घटना है।
