नई दिल्ली। होर्मुज जलमार्ग को लेकर जारी गतिरोध शनिवार को और बढ़ गया। एक ओर, ईरान ने इसे दोबारा खोलने संबंधी अपने फैसले को वापस लेते हुए वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के अभियान को जारी रखा। भारत आ रहे कच्चे तेल और गैस से लदे 14 जहाजों को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) ने होर्मुज से गुजरते समय रोक दिया और उनमें से दो जहाजों पर गोलीबारी की। इस घटना को लेकर नई दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत मोहम्मद फताअली को विदेश मंत्रालय ने शनिवार को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
महत्त्वपूर्ण सामरिक जलमार्ग होर्मुज को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे ऊर्जा संकट के और गहराने और दोनों देशों को फिर से संघर्ष की ओर धकेलने का खतरा पैदा कर दिया है, जबकि मध्यस्थ इस बात पर विश्वास जता रहे थे कि एक नया समझौता हो सकता है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने शनिवार को कहा, ‘होर्मुज पर नियंत्रण पहले जैसी स्थिति में लौट आया है सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन और नियंत्रण में।’ इसने चेतावनी दी कि जब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी प्रभावी रहेगी, तब तक वह जलमार्ग में आवागमन को अवरुद्ध करना जारी रखेगा।
ब्रिटेन की सेना ने शनिवार को कहा कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गनबोट ने होर्मुज से गुजर रहे एक टैंकर पर गोलीबारी की। ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड आपरेशन सेंटर’ ने कहा कि टैंकर को कोई नुकसान नहीं हुआ और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। ब्रिटेन की सेना ने कहा कि होर्मुज के निकट एक मालवाहक जहाज पर हमला किया गया। ईरान के रीिल्यूशनरी गार्ड की गोलीबारी की खबरों के बाद होर्मुज में दो भारतीय जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ा। यह घटना केशम और लारक द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र में घटी। ‘टैंकरट्रैकर्सडाट काम’ ने बताया कि इन जहाजों में भारतीय ध्वज वाला एक सुपर टैंकर भी शामिल है, जो इराक से 20 लाख बैरल तेल ले जा रहा है।
भारत आ रहे कच्चे तेल और गैस से लदे कुल 14 जहाजों के एक काफिले को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोरने होर्मुज से गुजरते समय रोका। दो जहाजों पर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप 13 जहाज फारस की खाड़ी में अलग-अलग स्थानों पर लौट गए। गोलीबारी में एक जहाज की एक खिड़की का शीशा टूट गया, जिसके कारण उसे यात्रा रोककर वापस लौटना पड़ा। दूसरे जहाज को कितना नुकसान हुआ, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन वह भी वापस लौट चुका है। सूत्रों के अनुसार, हालांकि भारतीय ध्वज वाला एक अन्य जहाज से गुजरा और अब भारत की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के लिए कच्चा तेल लदा हुआ है।
भारत आने वाले 14 जहाजों में से सात पर भारतीय ध्वज, चार पर लाइबेरिया का ध्वज, दो पर मार्शल द्वीप समूह का ध्वज और एक पर वियतनाम का ध्वज लगा हुआ है। इनमें से छह जहाजों में कच्चा तेल, तीन में एलपीजी और चार में उर्वरक लदे हुए हैं। इनमें से पांच मालवाहक जहाज हैं। सभी 14 जहाज एक कतार में थे। सूत्रों ने कहा कि इनमें से 13 जहाजों को ईरानी नौसेना ने रोक लिया और उन्हें इंतजार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, फंसे हुए 13 जहाजों में से सात जहाज लारक द्वीप के दक्षिण में हैं और ईरानी नौसेना से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार भारत आने वाले फंसे जहाजों की सुरक्षित यात्रा के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि जलमार्ग पहले जैसी स्थिति में लौट रहा है।
फैसले में यह बदलाव ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा जलमार्ग को खुला घोषित करने के एक दिन बाद आया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो होर्मुज को फिर से खोलने पर इसी तरह का रुख अपनाया था, लेकिन बाद में कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत किसी भी मुद्दे पर समझौता होने तक ईरान चाहे जो भी करे, अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी। डेटा विश्लेषण कंपनी केपलर ने कहा कि जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही अब भी उन्हीं गलियारों तक सीमित है, जिनके लिए ईरान की मंजूरी जरूरी है। कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर कहा सोमवार से शुरू हुई नाकेबंदी के बाद से अमेरिकी बल 21 जहाजों को वापस ईरान भेज चुके हैं।
होर्मुज जलमार्ग में तनाव बढ़ने के बावजूद, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान 22 अप्रैल की युद्धविराम समय सीमा से पहले एक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने इजराइल को लेबनान पर आगे हमले करने से रोक दिया है’।
