लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने पर समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हम जश्न मनाएंगे क्योंकि इनके नापाक मंसूबे फेल हो गए. इन्होंने महिला आरक्षण बिल की आड़ में, जो बिल एक बार पास हो गया है उसके साथ एक ऐसा संशोधन विधेयक शामिल करके लाए जिसके जरिए ये अपने हिसाब से इलेक्टोरल मैप को बदल सकें. ये अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए ये कारनामे कर रहे थे तो उसको हमने फेल किया है. इसके लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी.
महिला आरक्षण को जल्द लागू करे सरकार
इकरा हसन ने कहा, ”डिलिमिटेशन और सेंसस- इन दोनों को इन्होंने महिला आरक्षण बिल के साथ जोड़ दिया, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू करें. 2029 में चाहे सीटें बढ़े या न बढ़े, 543 सीट पर वो 33 फीसदी आरक्षण दे. विपक्ष का एक भी व्यक्ति उनके खिलाफ नहीं होगा.”
केंद्र सरकार की नीयत ठीक नहीं
सपा सांसद ने आगे कहा, ”महिला आरक्षण पर हम सब उनका साथ देंगे लेकिन उनकी नीयत ही ठीक नहीं है. ये बिल 2023 में पास हुआ था, वो चाहते तो इसे 2024 में लागू कर सकते थे. उन्होंने रातों रात डिमोनेटाइजेशन कर दी थी. ऐसा नहीं है कि कोई भी कानून लागू करने के लिए इनके पास संसाधन नहीं हैं. ये चाहते ही नहीं हैं. इन्होंने तीन साल पुराने बिल की परसों ही नोटिफिकेशन जारी की है. ये किसे बरगला रहे हैं. क्या इस देश की जनता या महिलाएं नहीं समझ रही हैं?
जनता के पैसे को बर्बाद कर रही केंद्र सरकार
उन्होंने केंद्र को घेरते हुए कहा, ”देश की महिलाएं आज चूल्हे जलाने के लिए मजबूर हैं, जिन्हें गैस सिलेंडर की परेशानी हो रही है. महिलाओं को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं. सरकार लगातार ऐसे मुद्दे ला रही है, पहले वंदे मातरम पर उन्होंने 10 दिन का डिबेट कराया था. अब इन्होंने उस बिल पर डिबेट कराया जो पहले ही पास हो चुका था. ये जनता के पैसे को बर्बाद कर रहे हैं. एक दिन सदन चलाने में साढ़े नौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं. ये बेबुनियाद बातों पर जनता का पैसा खर्च कराते हैं, जब इस देश में जब महंगाई चरम पर है, लोगों को गैस सिलेंडर तक नहीं मिल रहा है.”
