संसद के बजट सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया गया है। यह सर्वे देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, रोजगार, महंगाई और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विवरण देता है। आर्थिक सर्वे के पेश होते ही संसद में बजट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही को अब 1 फरवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है, जब केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया जाएगा।
आर्थिक सर्वे को बजट की आधारशिला माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर सरकार अपनी आर्थिक नीतियों और योजनाओं को अंतिम रूप देती है।
आर्थिक सर्वे से शुरू हुआ बजट सत्र, देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर हुई पेश
लोकसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वे 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। सर्वे के अनुसार, भारत की विकास दर में स्थिरता बनी हुई है और कई क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।
सर्वे की प्रमुख बातें:
* जीडीपी वृद्धि दर में मजबूती
* महंगाई दर में नियंत्रण
* निर्यात और निवेश में बढ़ोतरी
* डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार
* स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा
सरकार ने दावा किया है कि बीते वर्षों में किए गए सुधारों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
लोकसभा स्थगित, अब 1 फरवरी को होगा बजट पेश
आर्थिक सर्वे पेश होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया है। अब संसद की अगली बैठक 1 फरवरी 2026 को होगी, जब केंद्रीय वित्त मंत्री देश का आम बजट पेश करेंगे।
बजट 2026 से आम जनता, उद्योग जगत और निवेशकों को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि इस बजट में:
* किसानों के लिए नई योजनाएं
* युवाओं के लिए रोजगार पैकेज
* मध्यम वर्ग को कर राहत
* इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
* स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ाने
जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं
आर्थिक सर्वे पर सरकार ने संतोष जताया है। सत्तापक्ष का कहना है कि यह सर्वे सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाता है। नेताओं के अनुसार, भारत तेजी से एक मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था बन रहा है।
वहीं विपक्ष ने सर्वे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है। विपक्षी दलों का आरोप है कि महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को सही तरीके से नहीं दर्शाया गया है।
आगामी बजट सत्र में इन मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।
बजट 2026 से क्या हैं आम लोगों की उम्मीदें
देश की जनता की निगाहें अब 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं। आम लोग महंगाई से राहत, रोजगार के नए अवसर और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार संतुलित बजट पेश करने की कोशिश करेगी, जिसमें विकास और सामाजिक कल्याण दोनों को समान महत्व दिया जाएगा।
डिजिटल सेवाओं, हरित ऊर्जा, स्टार्टअप और ग्रामीण विकास को लेकर भी नए प्रावधान किए जा सकते हैं।
आर्थिक सर्वे के पेश होने के साथ ही बजट सत्र 2026 ने रफ्तार पकड़ ली है। यह सर्वे सरकार की नीतियों का आईना है और आने वाले बजट की दिशा तय करता है।
अब सबकी नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दिशा और आम जनता की उम्मीदों को आकार देगा। आने वाला बजट भारत के विकास की नई कहानी लिखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
