प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई होने जा रही है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और इसे लेकर देशभर में लोगों की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी रहती हैं। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ इस प्रकरण की सुनवाई करेगी, जो दोपहर दो बजे से शुरू होगी।
यह मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट और पांच अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा शाही ईदगाह मैनेजमेंट कमेटी और तीन अन्य पक्षकारों के खिलाफ दायर किया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि विवादित स्थल श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा हुआ है और इसे लेकर न्यायिक निर्णय आवश्यक है।
इस बीच मामले के एक प्रमुख पक्षकार और माता शाकंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में एक संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इस प्रार्थना पत्र में उन्होंने मांग की है कि वाद-पत्र में प्रयुक्त ‘शाही मस्जिद ईदगाह’ शब्द को हटाया जाए। उनकी मांग है कि इसके स्थान पर ‘मूल श्रीकृष्ण जन्मभूमि गर्भगृह’ शब्द का उपयोग किया जाए।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का कहना है कि ‘शाही मस्जिद ईदगाह’ शब्द वास्तविक ऐतिहासिक, धार्मिक और अभिलेखीय तथ्यों को सही रूप में प्रदर्शित नहीं करता। उनके अनुसार, विवादित स्थल का उल्लेख मूल श्रीकृष्ण जन्मभूमि गर्भगृह के रूप में किया जाना चाहिए, ताकि ऐतिहासिक सच्चाई सामने आ सके।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि वर्तमान शब्दावली से मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा होता है। इसलिए न्यायहित में इसमें संशोधन आवश्यक है। अदालत अब इस संशोधन प्रार्थना पत्र पर भी विचार करेगी।
गौरतलब है कि इस मामले में पिछली सुनवाई 12 दिसंबर 2025 को हुई थी। तब से लेकर अब तक पक्षकारों द्वारा विभिन्न कानूनी पहलुओं पर तैयारी की गई है। आज की सुनवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें आगे की कार्यवाही की दिशा तय हो सकती है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भी गहरी संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अदालत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सभी पक्षों को उम्मीद है कि न्यायालय निष्पक्षता के साथ तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेगा।
अब यह देखना अहम होगा कि हाई कोर्ट संशोधन प्रार्थना पत्र पर क्या रुख अपनाता है और मामले की आगे की सुनवाई किस दिशा में बढ़ती है।
