रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी महकमे ही बिजली कंपनी के लिए गले की फांस बन गए हैं। एक तरफ जहां आम जनता पर बिल न भरने पर तत्काल कार्रवाई की गाज गिरती है, वहीं दूसरी ओर जिले के रसूखदार सरकारी विभाग लाखों-करोड़ों की बिजली डकार कर बैठे हैं। ताजा मामला विद्युत वितरण कंपनी के पूर्व संभाग का है, जहां कार्यपालन यंत्री ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नौ प्रमुख विभागों को अल्टीमेटम जारी कर दिया है। हालत यह है कि दफ्तरों को रोशन करने, कूलर-पंखे चलाने और पंपों से पानी खींचने में तो अधिकारियों ने तत्परता दिखाई, लेकिन जब बात भुगतान की आई, तो अब पसीने छूट रहे हैं।
बिल भरो वरना कटेगा कनेक्शन
पूर्व संभाग के कार्यपालन यंत्री एस.के. यादव ने फरवरी माह में एक सख्त नोटिस जारी किया है। इसमें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बिना किसी रियायत के बिजली कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इस कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग प्रमुखों की होगी। सूत्रों की मानें तो यह समस्या केवल पूर्व संभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में सरकारी विभागों का यही ढर्रा बना हुआ है।

विभागों की फेहरिस्त: कौन कितना है कर्जदार?
विद्युत कंपनी द्वारा जारी सूची के अनुसार, स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा और पुलिस से लेकर वन विभाग तक, कोई भी विभाग भुगतान के मामले में पाक-साफ नहीं है। बकाया राशि का विवरण चौंकाने वाला है:
बिजली विभाग ने नौ प्रमुख सरकारी विभागों को थमाया नोटिस।
शिक्षा विभाग 30 लाख से अधिक के साथ सबसे बड़ा डिफॉल्टर।
आंगनवाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लाखों का बकाया।
समय सीमा में भुगतान न होने पर कनेक्शन काटने की तैयारी।
इन क्षेत्रों में सबसे बुरा हाल
पूर्व संभाग के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख जेई कार्यालयों के तहत ये विभाग संचालित हो रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से मनगवां, मनिकवार, गुढ़, गोविंदगढ़, गंगेव, बदलाव और रायपुर कर्चुलियान शामिल हैं। इन क्षेत्रों में संचालित सरकारी संस्थानों ने पिछले कई महीनों से फूटी कौड़ी भी जमा नहीं की है, जिससे बिल का पहाड़ खड़ा हो गया है।
“पसीने छूट रहे” मगर समाधान नहीं
विद्युत कंपनी के सूत्रों का दावा है कि सरकारी विभागों में बजट की कमी या प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह बिल पिछले 3 महीनों से अधिक समय से लंबित हैं। बार-बार सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ‘आनाकानी’ की मुद्रा में हैं। सबसे गंभीर स्थिति शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे आवश्यक सेवाओं वाले विभागों की है, जहां बिजली कटने की स्थिति में आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। विद्युत कंपनी अब आर-पार के मूड में है। कार्यपालन यंत्री एस.के. यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं। यदि सरकारी विभाग अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारते, तो जल्द ही इन दफ्तरों में अंधेरा छाना तय है।
