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कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश का ‘स्वर्ण युग’: खाद्यान्न और दलहन उत्पादन में रचा इतिहास; मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को घोषित किया ‘किसान कल्याण वर्ष’

"मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य दलहन उत्पादन में नंबर 1 और खाद्यान्न में दूसरे स्थान पर है। सरकार वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है।"

Published: February 24, 2026

भोपाल। मध्यप्रदेश ने अपनी उपजाऊ माटी और मेहनतकश किसानों के दम पर भारतीय कृषि के मानचित्र पर एक अमिट छाप छोड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की इस गौरवशाली उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश आज देश के शीर्ष कृषि उत्पादक राज्यों की पंक्ति में अग्रणी स्थान पर खड़ा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन में देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल होकर ‘देश का अन्न भंडार’ बन गया है।

मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय राज्य की सुदृढ़ कृषि नीतियों और किसानों के परिश्रम को देते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है, ताकि कृषकों की आय को दोगुना करने और उनके समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

आंकड़ों की जुबानी: खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश की छलांग
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया है। इस विशाल उत्पादन के साथ राज्य ने पूरे भारत में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी अब बढ़कर 13.04 प्रतिशत हो गई है, जो राज्य की बढ़ती कृषि क्षमता को दर्शाता है।

गेहूं और मक्का: राष्ट्रीय सुरक्षा के मजबूत स्तंभ
‘एमपी गेहूं’ की गुणवत्ता दुनिया भर में मशहूर है। इस वर्ष राज्य ने 24.51 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। राष्ट्रीय गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 20.78 प्रतिशत रहा। मक्का के क्षेत्र में भी राज्य ने अपनी धाक जमाई है। 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी 15.30 प्रतिशत रही, जिससे यह देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में से एक बनकर उभरा है। ‘श्रीअन्न’ को बढ़ावा देने की नीति के परिणामस्वरूप, राज्य ने मोटे अनाज के उत्पादन में 7.78 मिलियन टन का आंकड़ा छुआ और 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में तीसरा स्थान हासिल किया।

दलहन का ‘सिरमौर’: देश में प्रथम स्थान बरकरार
मध्यप्रदेश ने अपनी पारंपरिक पहचान को कायम रखते हुए कुल दलहन उत्पादन में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य ने 5.24 मिलियन टन दलहन का उत्पादन किया, जो देश की कुल हिस्सेदारी का 20.40 प्रतिशत है। विशेष रूप से चना उत्पादन में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन सराहनीय रहा। 2.11 मिलियन टन उत्पादन और 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ राज्य शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर काबिज रहा। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य की मृदा दलहन फसलों के लिए कितनी अनुकूल है।

तिलहन और सोयाबीन: ‘सोया स्टेट’ का गौरव पुनर्स्थापित
तिलहन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन कर 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की और देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। मध्यप्रदेश को ‘सोया स्टेट’ कहा जाता है, और इस वर्ष राज्य ने 5.38 मिलियन टन सोयाबीन का उत्पादन कर इस खिताब को सार्थक किया। यह देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है। तिलहन क्षेत्र में मूंगफली का भी बड़ा योगदान रहा। 1.55 मिलियन टन उत्पादन (राष्ट्रीय हिस्सेदारी का 12.99 प्रतिशत) के साथ मध्यप्रदेश मूंगफली उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर रहा।

सफलता के पीछे की रणनीति: सरकारी योजनाओं का असर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह उपलब्धियां अचानक नहीं मिली हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम हैं। राज्य सरकार ने तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल स्थापित किया है।

प्रमुख योजनाएं जिन्होंने बदली तस्वीर

  • फसलों का विविधीकरण: मांग आधारित कृषि के लिए किसानों को परंपरागत फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रेरित किया गया।
  • एक जिला-एक उत्पाद (ODOP): जिलेवार विशिष्ट फसलों की ब्रांडिंग और प्रसंस्करण (Processing) पर ध्यान दिया गया।
  • मिलेट मिशन और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना: मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा व सिंचाई योजना: प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा और हर खेत तक पानी पहुंचाने की प्रतिबद्धता ने उत्पादन में स्थिरता सुनिश्चित की।
  • भावांतर भुगतान योजना: बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से किसानों के हितों की रक्षा की गई।

2026: किसान कल्याण वर्ष का विजन

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि “किसान कल्याण वर्ष” केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक मिशन है। इसके तहत राज्य सरकार का ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं पर होगा:
  • कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) का संवर्धन: किसानों को संगठित कर उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना।
  • प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: रसायनों के उपयोग को कम कर भूमि की उर्वरता और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार।
  • भंडारण और लॉजिस्टिक्स: उपज की बर्बादी रोकने के लिए वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का विस्तार।
  • डिजिटल कृषि: उपग्रह डेटा और ड्रोन तकनीक के माध्यम से कीट नियंत्रण और पौध संरक्षण।

विकसित मध्यप्रदेश के लिए समृद्ध किसान
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मध्यप्रदेश न केवल आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ‘कृषि अर्थव्यवस्था’ के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश की यह कृषि क्रांति न केवल आंकड़ों में वृद्धि है, बल्कि राज्य के लाखों किसानों के जीवन स्तर में सुधार की एक जीवंत गाथा है।

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