सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला: किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला

Supreme Court: किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला

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सुप्रीम कोर्ट में न जाने कितने केस सालों से यूं ही पड़े हैं जिनकी आज तक सुनवाई नहीं हो पाई है। वहीं मकान मालिकों और किरायेदारों के झगड़ों पर विवाद बढ़ने के कारण ये मामले कोर्ट में आए दिन आए रहते है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऐसा मामला आया जिसे उसने 'क्लासिक' केस बताया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एक किरायेदार के खिलाफ फैसला सुनाया है, जिसने मकान मालिक पर तीन दशक से भी ज्यादा समय से कब्जा कर रखा था। दरअसल मामला 1967 का है, जब लबन्या प्रवा दत्ता ने अलीपुर में अपनी दुकान को 21 साल के लिए किराए पर उठाया था। 

लीज खत्म होने के बाद 1988 में मकान मालिक ने जब किरायेदार से दुकान खाली करने के लिए कहा उसने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद यह मामला 2005 सिविल कोर्ट में पहुंच गया। जिसका फैसला 2005 में मकान मालिक के पक्ष में आया। हालांकि किराएदार फिर भी नहीं माना और 2009 में उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवाई। 

इस पर जाकर अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। मकान मालिक और किराएदार का क्लासिक केसबेंच के जस्टिस किशन कौल और आर सुभाष रेड्डी ने कहा कि किसी के हक को लूटने के लिए कोई कैसे न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर सकता है, ये केस इसका 'क्लासिक' उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने किराएदार पर 1 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है, और साथ ही उसे मार्केट रेट पर 11 सालों का किराया भी देने का आदेश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर प्रॉपर्टी को मकान मालिक को सौंपने के आदेश भी दिए हैं।