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भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक: भारत का स्थान गिरकर 96वां, चिंताजनक स्थिति

Published: August 15, 2025

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी वार्षिक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index – CPI) 2024 में भारत की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई है। भारत 180 देशों की सूची में 96वें स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 93वें स्थान से तीन पायदान नीचे है। भारत का स्कोर 38 अंक रहा, जो 2023 के 39 अंक से एक अंक कम है।

सूचकांक की मुख्य विशेषताएं
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 0 से 100 के पैमाने पर देशों को रैंक करता है, जहां 0 का मतलब अत्यधिक भ्रष्ट और 100 का मतलब बिल्कुल साफ-सुथरा है। यह सूचकांक 1995 से प्रकाशित हो रहा है और सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को मापता है।

2024 के सूचकांक के अनुसार, दुनिया का औसत स्कोर 43 है, जो पिछले कई वर्षों से स्थिर है। 180 देशों में से दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम है।

शीर्ष और निम्नतम रैंकिंग

सबसे कम भ्रष्ट देश:
डेनमार्क (प्रथम स्थान)
फिनलैंड (द्वितीय स्थान)
सिंगापुर (तृतीय स्थान)

सबसे अधिक भ्रष्ट देश:
दक्षिण सूडान (8 अंक – अंतिम स्थान)
सोमालिया (9 अंक)
वेनेजुएला (10 अंक)

भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति
भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान 135वें स्थान पर, श्रीलंका 121वें स्थान पर, और बांग्लादेश 149वें स्थान पर रहा। चीन 76वें स्थान पर भारत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

वैश्विक स्थिति और चुनौतियां
32 देशों ने 2012 से अपने भ्रष्टाचार के स्तर में महत्वपूर्ण कमी लाई है, लेकिन 148 देश या तो स्थिर रहे हैं या उनकी स्थिति और खराब हुई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में अधिकतर देश असफल रहे हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के चेयरमैन फ्रांकोइस वैलेरियन ने कहा, “भ्रष्टाचार एक विकसित होता वैश्विक खतरा है जो केवल विकास को कमजोर नहीं करता, बल्कि लोकतंत्र के पतन, अस्थिरता और मानवाधिकारों के हनन का मुख्य कारण है।”

सूचकांक की कार्यप्रणाली
यह सूचकांक 13 बाहरी स्रोतों से डेटा का उपयोग करता है, जिसमें विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच, निजी जोखिम और परामर्श कंपनियां, थिंक टैंक और अन्य शामिल हैं। स्कोर विशेषज्ञों और व्यापारियों के विचारों को दर्शाते हैं, न कि आम जनता के।

  • भारत के लिए चिंता के विषय
    भारत की गिरती रैंकिंग कई चिंताजनक प्रवृत्तियों को दर्शाती है:
    प्रशासनिक भ्रष्टाचार: सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भाई-भतीजावाद की समस्या जारी है।
    न्यायिक चुनौतियां: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल और मामलों के निपटारे में देरी।
    कॉर्पोरेट गवर्नेंस: व्यापारिक क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी और नियामक कमजोरियां।
    चुनावी सुधार: राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता की आवश्यकता।

सुधार की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में तत्काल सुधार की आवश्यकता है:
डिजिटलीकरण: सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण भ्रष्टाचार कम करने में सहायक हो सकता है।
पारदर्शिता: सूचना का अधिकार कानून को मजबूत बनाना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना।
संस्थागत सुधार: लोकपाल, सीवीसी, और अन्य भ्रष्टाचार विरोधी संस्थानों को मजबूत बनाना।
न्यायिक सुधार: न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना।

भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2024 में भारत की गिरती रैंकिंग एक चेतावनी है। जब दुनिया जलवायु संकट और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब भ्रष्टाचार इन प्रयासों में बड़ी बाधा बन रहा है।

भारत को अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने, और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक व्यापक रणनीति अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। केवल तभी देश सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है और अपने नागरिकों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।

यह सूचकांक न केवल एक रैंकिंग है, बल्कि यह भारत के लिए आत्मचिंतन का अवसर भी है कि वह अपनी शासन व्यवस्था में सुधार कैसे ला सकता है और भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण कैसे कर सकता है।

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