मऊगंज। आगामी जनगणना 2027 को सुचारू, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के लिए मऊगंज जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। प्रमुख जनगणना अधिकारी एवं जिला कलेक्टर संजय कुमार जैन की अध्यक्षता में जिला जनगणना समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनगणना के प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया। बैठक के दौरान कलेक्टर श्री जैन ने स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना केवल एक सांख्यिकीय कार्य नहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास होगा। उन्होंने कहा कि “अच्छा प्रशिक्षण जनगणना को सरल बनाएगा” और इसी मूलमंत्र के साथ सभी अधिकारियों को कार्य करना है।
दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि आगामी जनगणना भारत की अब तक की दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना होने जा रही है। इस बार की पूरी प्रक्रिया कागज-रहित और पूर्णतः तकनीक पर आधारित होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
लक्ष्य: 2027 की जनगणना को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना।
तकनीक: मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का अनिवार्य उपयोग।
नागरिक सुविधा: ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं फॉर्म भरने का विकल्प।
सुरक्षा: बायोमेट्रिक लॉक और साइबर सुरक्षा के कड़े निर्देश।
प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं:
स्वयं गणना (Self-Enumeration): नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर स्वयं अपना फॉर्म भर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनेगी।
गोपनीयता और सुरक्षा: पोर्टल पर दर्ज की गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी।
बायोमेट्रिक लॉक: सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जानकारी दर्ज करने के बाद बायोमेट्रिक लॉक का प्रावधान किया गया है, ताकि यूजर आईडी और डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
दो चरणों में संपन्न होगा कार्य
जनगणना के विशाल स्वरूप को देखते हुए इसे दो चरणों में विभाजित किया गया है:
प्रथम चरण: 1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक संचालित होगा।
द्वितीय चरण: 1 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संपन्न किया जाएगा।
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि प्रशासनिक सीमाओं का निर्धारण इस प्रकार किया जाए कि किन्हीं भी दो गांवों की सीमा आपस में न मिले। साथ ही, जिस भवन की गणना की जाएगी, उस पर जनगणना का सीरियल नंबर अंकित करना अनिवार्य होगा।
तकनीकी प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा
बैठक में उपस्थित कर्मचारियों को बीएलबीसी ऐप, मकान सूचीकरण, डैशबोर्ड इंटरफेस, असाइनमेंट और हाउस मैपिंग जैसी तकनीकी बारीकियों का विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर:
डिजिटल माध्यम होने के कारण कलेक्टर ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सख्त निर्देश दिए हैं:
कर्मचारी कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल चार्जिंग (Juice Jacking) से बचें।
फिशिंग, क्विशिंग और क्लोनिंग जैसे संदिग्ध ऐप के प्रयोग के प्रति सावधान रहें।
किसी भी तकनीकी समस्या के समाधान के लिए डीआईएनआईसी (DINIC) की सहायता ली जा सकेगी।
- क्या जानकारियां होंगी एकत्रित?
इस डिजिटल जनगणना में परिवार के मुखिया से विस्तृत जानकारी ली जाएगी, जिसमें शामिल हैं:
घर की भौतिक स्थिति और शौचालय की उपलब्धता।
परिवार के सदस्यों की जानकारी और इंटरनेट सुविधा।
वाहन स्वामित्व, एलपीजी कनेक्शन और पीने के पानी का स्रोत।
मुख्य अनाज और अन्य जीवनोपयोगी सुविधाएं।
केवल नियमित कर्मचारी ही करेंगे कार्य
मानव संसाधन प्रबंधन पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य में केवल नियमित सरकारी कर्मचारियों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। विभागों में अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही बनी रहे।
बैठक में अपर कलेक्टर पीके पांडेय, संयुक्त कलेक्टर एपी द्विवेदी सहित जनगणना कार्य से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
