रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी अनाज के भंडारण में बड़े पैमाने पर अनियमितता और गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वेयर हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन से अनुबंधित शुक्ला वेयर हाउस उमरी में पिछले चार वर्षों के दौरान कुल 8628.78 क्विंटल धान कम पाया गया है। इस ‘शार्टेज’ की अनुमानित कीमत 2 करोड़ 24 लाख 34 हजार 828 रुपये बताई जा रही है। इस गंभीर मामले को सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाया है, जिस पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री 5 मार्च 2026 को सदन में जवाब पेश करेंगे।
वर्षवार शार्टेज का गणित: करोड़ों की चपत
विधायक अभय मिश्रा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भेड़रहा शाखा के अंतर्गत आने वाले शुक्ला वेयर हाउस उमरी के ‘लॉस-गेन’ विवरण पत्रक (2020-21 से 2024-25) ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, धान की मात्रा में लगातार कमी दर्ज की गई:
वर्ष 2020-21: 1490.82 क्विंटल धान कम।
वर्ष 2021-22: 1274.64 क्विंटल धान कम।
वर्ष 2023-24: 2981.26 क्विंटल धान कम।
वर्ष 2024-25: 2522.73 क्विंटल धान कम।
कुल धान शार्टेज: 8628.78 क्विंटल।
गेहूं की शार्टेज (2024-25): 359.33 क्विंटल।
कुल मिलाकर, सरकारी खजाने को 2.24 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी चपत लगाई गई है, जो सीधे तौर पर वसूली योग्य और आपराधिक गबन की श्रेणी में आता है।
विधायक के तीखे सवाल: ब्लैकलिस्टेड और एफआईआर की मांग
विधायक अभय मिश्रा ने सरकार से पूछा है कि इतनी बड़ी मात्रा में अनाज गायब होने के बावजूद संबंधित वेयर हाउस मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई? उन्होंने मांग की है कि:
संबंधित वेयर हाउस को तत्काल ब्लैकलिस्टेड किया जाए।
गबन की गई पूरी राशि की वसूली की जाए।
जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कर उन्हें कार्य से पृथक किया जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मान्य सीमा (2%) से अधिक की शार्टेज होने के बाद भी इस वेयर हाउस को खरीदी कार्य से क्यों नहीं हटाया गया?
मुख्यालय सक्रिय: जिला प्रबंधक (NAN) से मांगा गया ब्यौरा
विधानसभा में प्रश्न लगते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। म.प्र. स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन मुख्यालय भोपाल की महाप्रबंधक (भंडारण) सुलेखा सुदेश उइके ने जिला प्रबंधक (DM NAN) रीवा को पत्र जारी कर वांछित ब्यौरा तलब किया है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा में जवाब देने से पहले विभाग इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिसकी आंच ब्रांच मैनेजर से लेकर कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकती है।
राइस मिलरों की समस्या और भेदभाव का मुद्दा भी उठा
विधानसभा में केवल अनाज की कमी ही नहीं, बल्कि कस्टम राइस मिलिंग से जुड़ी समस्याओं पर भी सवाल दागे गए हैं। तारांकित प्रश्न क्रमांक 2972 के जरिए सरकार से ‘अपग्रेडेशन राशि’ और ‘मिलिंग रेट’ पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्रमुख सवाल:
अपग्रेडेशन राशि: चावल की गुणवत्ता सुधार के लिए वर्ष 2022-23 से अब तक मिलरों को कितनी राशि जिलेवार दी गई?
मिलिंग रेट में भेदभाव: राइस मिलरों को ट्रांसपोर्टरों की तुलना में कम भुगतान क्यों किया जा रहा है? इस भेदभाव का ठोस कारण क्या है?
टेस्ट मिलिंग: क्या धान की गुणवत्ता की टेस्ट मिलिंग कराई गई? यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
भविष्य की नीति: प्रदेश में बढ़ते धान उत्पादन को देखते हुए सरकार की क्या कोई ठोस नीति है?
रीवा में वेयर हाउसिंग के नाम पर चल रहा यह ‘खेल’ कोई नया नहीं है, लेकिन 8628 क्विंटल धान का गायब होना सिस्टम की गहरी खामियों को उजागर करता है। अब 5 मार्च 2026 को विधानसभा में होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि क्या दोषी वेयर हाउस मालिक और भ्रष्ट अधिकारी जेल जाएंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
