कुतुब मीनार को अपनी पुश्तैनी संपत्ति बताने वाले शख्स को कोर्ट से झटका, 'मंदिर की मरम्मत' पर होगी बहस

कुतुब मीनार परिसर के भीतर हिंदुओं और जैनियों के लिए पूजा करने के अधिकार की मांग करने वाली एक अपील की हो रही जांच 
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Shock from the court for the one who told Qutub Minar to be ancestral property

मंगलवार को दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक व्यक्ति के हस्तक्षेप के आवेदन को खारिज कर दिया। उसके द्वारा दावा किया गया था कि जिस जमीन पर कुतुब मीनार खड़ा है, वह उसकी पुश्तैनी संपत्ति है। जिस पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार ने सुनवाई करते हुआ कहा कि मुख्य मुकदमे पर बहस 19 अक्टूबर से शुरू होगी। विस्तृत आदेश का इंतजार है।

बता दें कि यह आवेदन एक कुंवर महेंद्र धवज प्रसाद सिंह द्वारा ट्रांसफर की गई थी, जिसमें दावा किया था कि वह आगरा के संयुक्त प्रांत के शासक का उत्तराधिकारी है जिसके आधार पर उसने उस संपत्ति पर अधिकार का दावा किया है, जहां मस्जिद है।

बता दें कि अधिवक्ता हरि शंकर जैन और रंजना अग्निहोत्री द्वारा जैन तीर्थंकर ऋषभ देव और हिंदू भगवान विष्णु की ओर से कुतुब मीनार में पूजा करने के अधिकार की अपील में दायर किया गया था।

बता दें कि साकेत कोर्ट वर्तमान में कुतुब मीनार परिसर के भीतर हिंदुओं और जैनियों के लिए पूजा करने के अधिकार की मांग करने वाली एक अपील की जांच कर रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि वह 19 अक्टूबर को कुतुब मीनार परिसर के अंदर हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग करने संबंधी मुकदमे पर सुनवाई करेगा। बता दें कि इससे पहले कोर्ट जून में कहा था कि अर्जी में सुनवाई के बिना वह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद में इबादत के अधिकार को लेकर फैसला नहीं कर सकती।

बता दें कि अदालत ने आवेदन पर पिछले हफ्ते अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था क्योंकि एएसआई द्वारा न्यायाधीश से याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने का आग्रह किया गया था, जिसमें  एएसआई ने तर्क दिया गया था कि यह एक प्रचार का स्टंट था और उसने इस तरह कर के अदालत का समय बर्बाद किया है। 

वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बात रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 16वीं शताब्दी के बाद से गंगा और यमुना नदियों के बीच के इलाके आगरा के संयुक्त प्रांत के शासक का उत्तराधिकारी था। उन्होंने कहा कि सरकार ने इलाके में कब्जा कर लिया है और यहां तक कि इस संबंध में तीन याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही लंबित हैं। बता दें कि याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और संबंधित अधिकारियों को अपने 'संवैधानिक विवाद' को निपटाने के लिए प्रतिनिधित्व किया था।