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New Court Complex Inaugurated: आजादी के पहले से रीवा की न्याय व्यवस्था रही आदर्श उसी संकल्प को साकार करेगा आधुनिक कोर्ट भवन

Published: May 5, 2025

विंघ्य भास्कर, रीवा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 96 करोड़ की लागत से बने रीवा के नए जिला न्यायालय परिसर का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके महेश्वरी, जस्टिस एससी शर्मा के साथ ही हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत सहित कई अन्य न्यायायिक अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 1834 में रीवा के तत्कालीन महाराजा विश्वनाथ सिंह ने न्याय प्रणाली का विस्तार किया। पूरा मामला सुनने और बहस के बाद फैसला देने की शुरुआत की थी। उसी संकल्प को अब आधुनिक कोर्ट भवन आगे साकार करेगा।

  • मुख्यमंत्री ने नए कोर्ट परिसर का किया लोकार्पण, कार्यक्रम में शामिल हुए सुप्रीम कोर्ट के जज और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस

हमारे देश में राजा हरिश्चन्द्र और महाराजा विक्रमादित्य जैसे प्रतापी और न्यायप्रिय राजाओं की परंपरा रही है। जिन्होंने सदैव जनहित और देशहित में निष्पक्ष होकर न्याय किया। इस दौरान मुयमंत्री ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि तब की सरकार ने वोट बैंक की राजनीति करते हुए कोर्ट के फैसले को बदला था। अब मोदी के नेतृत्व में कोर्ट के हर फैसले का समान होता है। अयोध्या राममंदिर विवाद पर आए फैसले और दोनों पक्षों द्वारा स्वागत करने का उदाहरण भी दिया। साथ ही कहा कि रीवा में न्याय की गौरवशाली परंपरा रही है। समारोह में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश मोहन प्रधान ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया।

ये रहे मौजूद: समारोह में हाईकोर्ट के न्यायाधीश विशाल मिश्रा, एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह, प्रमुख सचिव न्याय विभाग एनपी सिंह, सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक दिव्यराज सिंह, मनगवां नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता आदि उपस्थित रहे। कमिश्नर बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह, स्टेट बार काउंसिल के सदस्य अखण्ड प्रताप सिंह, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र पाण्डेय, वीरेन्द्र सिंह बघेल, लक्ष्मीनारायण मिश्रा, शिवेन्द्र उपाध्याय, सुशील तिवारी, घनश्याम सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।

न्याय प्रणाली में बिल्डिंग से काम नहीं चलता, मानवीय मूल्य जरूरी: जस्टिस सूर्यकांत


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, रीवा का यह जिला कोर्ट पर आधुनिक है। केवल अच्छी बिल्डिंग बन जाने से खुश होने की जरूरत नहीं है। न्याय प्रणाली के लिए मानवीय मूल्यों का होना जरूरी है। यह सुविधा अकेले जज और वकीलों को आराम देने के लिए नहीं बल्कि न्याय की उमीद लेकर आने वाले लोगों के लिए है, यह तब साबित होगा जब उन्हें सहजता से न्याय मिलेगा। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था और अस्पताल की व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि दोनों जगह बड़ी उमीद के साथ लोग आते हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, भारत की न्यायिक सुविधाएं दुनियाभर में पारदर्शी और आधुनिक मानी जाती हैं। जहां न्याय व्यवस्था अच्छी होती है वहां बाहर की कंपनियां इंवेस्ट करती हैं और इससे देश का हर हिस्सा तरक्की के रास्ते पर बढ़ता है।

विश्वनाथ सिंह ने दो भागों में न्याय प्रणाली को बांटा था: माहेश्वरी


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा, रीवा की न्याय व्यवस्था आजादी के पहले से देशभर में आदर्श रही है। यहां के महाराजा विश्वनाथ सिंह ने वर्षों दो तरह से न्यायिक प्रणाली को विभाजित किया था। जिसमें मिताक्षरा न्यायालय में हिन्दू धर्म की परंपराओं के अनुसार तथा धर्मसभा में फैसला सुनाने से पहले बहस होती थी, दोनों पक्षों को सुना जाता था। वहीं रेत-गिट्टी से बना यह भवन पर्याप्त नहीं है, इस भवन में जब करूणा, विवेक और न्याय होगा तभी इसकी आत्मा जागृत होगी। न्याय प्रणाली में व्यवस्थाएं, व्यवहार और विनम्रता तीनों का समावेश जरूरी है।

सीएम के आगमन पर किसान नेताओं को किया हाउस अरेस्ट
संयुक्त किसान मोर्चा ने जताई नाराजगी

रीवा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रीवा आगमन पर जिला प्रशासन के निर्देश पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं के घरों पर पुलिस का पहरा लगाया गया। इस दौरान किसान नेताओं को कार्यक्रम समाप्त होने तक बाहर नहीं जाने दिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शिव सिंह ने इस कार्रवाई को तानाशाहीपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि रीवा संभाग सहित प्रदेशभर में गेहूं खरीदी की अवधि पूरी नहीं हो पाई, जिससे किसान अपना 50 प्रतिशत से भी कम गेहूं बेच पाए हैं। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री से गेहूं खरीदी की समय-सीमा बढ़ाए जाने की मांग का ज्ञापन सौंपना था। जिला प्रशासन अपने प्रशासनिक असफलताओं को छुपाने के लिए किसान नेताओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। शिव सिंह ने बताया कि किसान नेता लालमणि त्रिपाठी, रामजीत सिंह, सुग्रीव सिंह, इंद्रजीत सिंह, सोभनाथ कुशवाहा, अशोक चतुर्वेदी, प्रदीप बंसल सहित कई नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात रही। शिव सिंह ने बताया कि उनके साथ भी पुलिस द्वारा संपर्क किया गया। मोर्चा ने मुयमंत्री से रीवा में गेहूं खरीदी की अवधि बढ़ाने की घोषणा की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

आधुनिक सुविधाओं से सभी को लाभ होगा: द्विवेदी

हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय द्विवेदी ने कहा कि जिला अदालतों में यह सबसे आधुनिक परिसर के रूप में विकसित होगा। इससे न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों सभी को सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह नए परिसर विकसित हो रहे हैं।

विंध्य विद्वानों और विभूतियों को देने वाला क्षेत्र है: जस्टिस शर्मा


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीशचन्द्र शर्मा ने कहा कि रीवा में विधि का इतिहास बहुत महत्वपूर्ण है। इसी माटी से निकलकर जीपी सिंह हाईकोर्ट के मुय न्यायाधीश थे। पिताजी ने विधि क्षेत्र में काम की शुरुआत करने से पहले उन्हीं से आशीर्वाद लेने भेजा था। यहां के कई जज और अधिवक्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर रहे हैं। सैनिक स्कूल रीवा से पढ़े दो लोग आज सेना के दो हिस्सों का नेतृत्व कर रहे हैं। रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर जैसी जगह पर काम किया है, उसका लाभ रीवा को मिलेगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह के नाती पार्थ सिंह के निधन पर मंच से ही जस्टिश शर्मा ने दु:ख व्यक्त किया।

यह भवन विंध्य का बढ़ाएगा गौरव: शुक्ल


उप मुयमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा के लिए नवीन जिला न्यायालय भवन की सौगात खुशी और गौरव लेकर आई है। रीवा ही नहीं पूरा विन्ध्य तेजी से विकास कर रहा है। यहां 40 मिलियन टन सीमेंट और 15 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन सहित अत्यधिक मात्रा में कोयले का भी उत्पादन होता है। विन्ध्य में रेलवे लाइन, फोरलेन सडक़ों और एयरपोर्ट निर्माण के साथ हर क्षेत्र में विकास में तेजी आई है।

रीवा की न्यायिक प्रणाली पुरानी: सचदेवा


हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा, रीवा की न्यायिक प्रणाली देश के संविधान से भी पुरानी है। यहां राजशाही विन्ध्य प्रदेश के समय भी मजबूत न्याय व्यवस्था थी। रीवा हाईकोर्ट से बघेलखंड और बुंदेलखंड के 21 जिलों के प्रकरणों का निराकरण होता था। उस समय रीवा के साथ ही नौगांव में भी बेंच थी। नवीन न्यायालय भवन से रीवा की न्यायालयीन परंपरा को नया आयाम मिलेगा।

 

 

 

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