रीवा। संजय गांधी अस्पताल में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं को लेकर सोमवार को प्रशासन ने सख्ती दिखाई। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती भीड़, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, वार्डों में अव्यवस्था, मरीजों के साथ परिजनों की समस्याएं और इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों के बीच कलेक्टर ने देर रात अस्पताल का निरीक्षण किया। वहीं दूसरी ओर विभिन्न घटनाओं को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
कलेक्टर ने रात करीब 10 बजे संजय गांधी अस्पताल पहुंचकर इमरजेंसी सहित कई वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों और परिजनों से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के बाहर और वार्डों में मरीजों एवं उनके परिजनों की भारी भीड़ दिखाई दी। कलेक्टर ने इमरजेंसी वार्ड के बाहर मरीजों को जमीन पर लेटे देखकर नाराजगी जताई और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज के साथ केवल एक अटेंडर को ही रहने की अनुमति होगी।
अस्पताल में ओपीडी और भर्ती मरीजों की संख्या तीन हजार से अधिक पहुंचने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। सोमवार को ओपीडी में हजारों मरीज पहुंचे, जबकि विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अस्पताल की लिफ्टों पर भी मरीजों और परिजनों की लंबी कतारें देखी गईं। एक लिफ्ट लंबे समय से बंद होने के कारण दूसरी लिफ्ट पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। मरीजों का कहना है कि उन्हें लिफ्ट के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है।
इसी बीच मेडिसिन विभाग में जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने के मामले में भी कार्रवाई की गई। प्रबंधन की आलोचना के बाद नए डीन ने डॉ. बघेल को हटाकर डॉ. इंदुरकर को मेडिसिन विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया। मामले में संबंधित चिकित्सकों को शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
अस्पताल में एक महिला के मुंह में कीड़ा मिलने के आरोप ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में लापरवाही हुई, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया। महिला के परिजनों ने बेहतर उपचार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
उधर, मृतका कल्पना मिश्रा के परिजनों का धरना भी जारी है। परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया। दूसरी ओर डिप्टी सीएम के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं पर एफआईआर और कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने डिप्टी सीएम पर निशाना साधते हुए इस्तीफे की मांग की, जबकि भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजय गांधी अस्पताल में प्रशासनिक निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल अस्पताल की भीड़, डॉक्टरों की उपलब्धता, लिफ्ट व्यवस्था और मरीजों की शिकायतें प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
