प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण और Swami Avimukteshwaranand के बीच चल रहा विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। माघ मेला प्राधिकरण द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अंग्रेजी भाषा में 8 पन्नों की विस्तृत चिट्ठी भेजी है। इस पत्र में उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है— “हां, मैं ही ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य हूं।”
यह पूरा मामला अब धार्मिक, प्रशासनिक और कानूनी तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
अंग्रेजी में 8 पन्नों की चिट्ठी लिखकर नोटिस का दिया जवाब, ज्योतिष्पीठ विवाद का किया विस्तृत उल्लेख
क्या था माघ मेला प्राधिकरण का नोटिस
Prayagraj Magh Mela Authority की ओर से मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक पेज का नोटिस भेजा गया था। नोटिस में उनसे सवाल किया गया था कि वे खुद को **ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य** के रूप में क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला पहले से ही Supreme Court of India में लंबित है।
प्राधिकरण का कहना था कि जब तक कानूनी फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी को इस पद का दावा करने से बचना चाहिए।
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8 पन्नों में दिया गया जवाब
मेला प्राधिकरण के एक पेज के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से 8 पन्नों का अंग्रेजी में लिखा गया जवाब भेजा गया है। इस पत्र में उन्होंने धार्मिक परंपराओं, शास्त्रों, गुरु-शिष्य परंपरा और ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए अपने शंकराचार्य होने का दावा दोहराया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि शंकराचार्य की परंपरा किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि सनातन धर्म की मान्यताओं और अखाड़ा परंपरा से तय होती है।

प्रशासन को ई-मेल और दफ्तर दोनों जगह भेजा जवाब
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से यह जवाब माघ मेला प्राधिकरण की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भी भेजा गया और साथ ही सेक्टर-4 में स्थित मेला प्राधिकरण के कार्यालय में भी पहुंचाया गया।
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हालांकि, जब उनकी टीम जवाब लेकर दफ्तर पहुंची, उस समय कोई भी जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं था। इसके बाद उनके अनुयायियों ने कार्यालय के गेट पर ही नोटिस का जवाब चस्पा कर दिया।
समर्थकों में रोष, प्रशासन पर सवाल
इस घटनाक्रम के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि एक धर्मगुरु को इस तरह नोटिस भेजना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। समर्थकों ने सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो मेला प्राधिकरण को इस तरह का नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।

ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य विवाद की पृष्ठभूमि
ज्योतिष्पीठ (उत्तराखंड) के शंकराचार्य पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी विवाद के चलते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, खासकर माघ मेले के दौरान उनकी उपस्थिति के कारण।

माघ मेला प्राधिकरण और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह पत्राचार अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। जहां एक ओर प्रशासन कानूनी प्रक्रिया का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धार्मिक परंपरा और शास्त्रों के आधार पर अपने दावे पर अडिग हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर प्रशासन और अदालत का रुख क्या रहेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

