भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सरकारी कार्यप्रणाली और नियमों की अनदेखी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री राकेश सिंह ने सदन में स्वीकार किया है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने प्रदेश के कई मार्गों पर टोल वसूली के लिए निर्धारित नियमों को ताक पर रख दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि कम से कम 7 टोल नाकों पर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले ही अवैध रूप से वसूली शुरू कर दी गई थी।
यह पूरा मामला कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में सामने आया है। इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है और सरकार की ‘ट्रस्टी’ वाली भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिसूचना बाद में, वसूली पहले: आंकड़ों का खेल
मंत्री द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, MPRDC ने अधिसूचना जारी होने की प्रतीक्षा किए बिना ही जनता की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया था। नीचे दी गई तालिका इस अवैध वसूली की गंभीरता को दर्शाती है:
| मार्ग (रोड) | आधिकारिक अधिसूचना की तिथि | वास्तविक टोल वसूली की शुरुआत |
| भोपाल बायपास | 8 दिसंबर 2020 | 12 दिसंबर 2019 |
| इंदौर-उज्जैन | 30 दिसंबर 2022 | 21 जनवरी 2022 |
| सागर-दमोह | 8 दिसंबर 2021 | 28 फरवरी 2021 |
| भिंड-गोपालपुरा | 4 जनवरी 2022 | 19 मार्च 2021 |
| गुना-ईसागढ़ | 10 अक्टूबर 2024 | 2 जून 2023 |
| महू-घाटाबिल्लोद | 24 दिसंबर 2021 | 28 फरवरी 2021 |
| बीना-खिमलासा | 8 दिसंबर 2021 | 19 मार्च 2021 |
MPRDC की कमाई का भारी-भरकम आंकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, MPRDC की 43 सड़कों पर पिछले तीन वर्षों में (दिसंबर 2025 तक) कुल 1102.15 करोड़ रुपये का टोल वसूला गया है। इसमें से रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर 498.49 करोड़ रुपये व्यय किए गए। इस प्रकार, इन सड़कों से निगम ने 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है।
सर्वाधिक वसूली वाले प्रमुख मार्ग:
- भोपाल बायपास: 284.33 करोड़ रुपये।
- इंदौर-उज्जैन रोड: 130.41 करोड़ रुपये।
- महू-घाटाबिल्लोद: 122.90 करोड़ रुपये।
- सागर दमोह रोड: 95.59 करोड़ रुपये।
विधायक प्रताप ग्रेवाल का कड़ा प्रहार
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इस वसूली को पूर्णतः ‘अवैध’ करार देते हुए कहा कि इंडियन टोल एक्ट के तहत सरकार या उसकी एजेंसियां अपनी मर्जी से टोल नहीं वसूल सकतीं। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कें जनता की संपत्ति हैं और शासन मात्र उनका ट्रस्टी है। एक ट्रस्टी का काम जनता की संपत्ति से बेजा लाभ कमाना नहीं है। ग्रेवाल ने सुप्रीम कोर्ट के मंदसौर पुलिया मामले के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी निवेशक सड़क की लागत, ब्याज और रखरखाव के खर्च से अधिक टोल नहीं वसूल सकता। लेकिन यहाँ MPRDC ने नियमों को तोड़कर अधिसूचना से एक साल पहले ही उगाही शुरू कर दी।
दूसरी ओर: स्मार्ट मीटर से विभाग को 692 करोड़ का ‘पावर’ लाभ
विधानसभा में केवल टोल ही नहीं, बल्कि बिजली विभाग के ‘स्मार्ट मीटर’ प्रोजेक्ट पर भी तीखी बहस हुई। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कांग्रेस विधायक आतिफ अकील के सवाल पर बताया कि भोपाल और जबलपुर संभागों में स्मार्ट मीटर लगने से विभाग के राजस्व में 692 करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है।
जबलपुर संभाग: बिलिंग दक्षता 73.77% से बढ़कर 82.16% हुई, जिससे 314 करोड़ का फायदा हुआ।
भोपाल संभाग: यहाँ राजस्व में 378 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई।
इंस्टालेशन: भारी शिकायतों के बावजूद भोपाल में 50% और नरसिंहपुर में 57% स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
जनता की जेब और सरकारी आंकड़े
विधानसभा में आए ये दोनों ही मामले (टोल और स्मार्ट मीटर) एक ही बात की ओर इशारा करते हैं सरकारी खजाने को भरने के लिए नियमों की लचीली व्याख्या की जा रही है। जहाँ MPRDC अधिसूचना के बिना टोल वसूल रहा है, वहीं बिजली विभाग शिकायतों के अंबार के बीच स्मार्ट मीटरों को सफलता बता रहा है। सदन में इन खुलासों के बाद अब जनता और विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
