रीवा। विंध्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग चर्चा का केंद्र बना हुआ है। रीवा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कुर्सी किसी ‘म्यूजिकल चेयर’ की तरह हो गई है, जहाँ प्रभार कब किसके पास चला जाए, यह कहना मुश्किल है। वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रभारी CMHO की नियुक्ति को लेकर जिला कलेक्टर और वरिष्ठ चिकित्सकों के बीच कानूनी जंग छिड़ गई है। वरिष्ठता की अनदेखी और उच्च न्यायालय के आदेशों की कथित अवमानना ने पूरे महकमे में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
“आज प्रभारी कौन है?”
रीवा CMHO की कुर्सी को अब किसी अस्थायी पैचवर्क की नहीं, बल्कि एक स्थायी और विधि-सम्मत ‘स्वास्थ्य लाभ’ की जरूरत है। 6 मार्च 2026 को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि रीवा के स्वास्थ्य विभाग की कमान किसके हाथ में होगी। तब तक, महकमे में यह सवाल तैरता रहेगा—“आज प्रभारी कौन है?”
कलेक्टर के आदेश से शुरू हुआ नया विवाद
पूरा मामला 19 फरवरी 2026 को जारी एक आदेश से गरमाया। रीवा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिला क्षय अधिकारी डॉ. अनुराग शर्मा को तत्काल प्रभाव से CMHO का प्रभार सौंप दिया। प्रशासन का तर्क है कि कार्यालयीन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों के जनवरी 2026 के वेतन भुगतान और अन्य लंबित वित्तीय प्रकरणों के निराकरण के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
परंतु, इस आदेश ने एक नए कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। वरिष्ठ चिकित्सक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.बी. चौधरी ने इस नियुक्ति को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया है और इसे अपनी वरिष्ठता का हनन बताया है।
हाईकोर्ट की अवमानना की चेतावनी: डॉ. चौधरी का कड़ा रुख
डॉ. आर.बी. चौधरी, जो पूर्व से ही प्रभार के मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण में हैं, ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर आक्षेप लगाए हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि:
वरिष्ठता की अनदेखी: डॉ. चौधरी जिले के वरिष्ठ चिकित्सक हैं, जबकि डॉ. अनुराग शर्मा उनसे जूनियर हैं। नियमों के मुताबिक प्रभार वरिष्ठतम विशेषज्ञ को मिलना चाहिए।
स्थगन आदेश का उल्लंघन: डॉ. चौधरी का दावा है कि उच्च न्यायालय ने 16 जनवरी 2026 को इस मामले में स्थगन (Stay) दिया था। इसके बावजूद एक कनिष्ठ चिकित्सक को प्रभार देना सीधे तौर पर ‘न्यायालय की अवमानना’ (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है।
अगली सुनवाई: मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई 6 मार्च 2026 को होनी है। डॉ. चौधरी ने चेतावनी दी है कि वे कलेक्टर और डॉ. अनुराग शर्मा के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर करेंगे।
अधिकार क्षेत्र पर सवाल: क्या कलेक्टर को है प्रभार देने का हक?
डॉ. चौधरी ने शासन के उस आदेश की ओर ध्यानाकर्षण कराया है जो 6 सितंबर 2023 को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी किया गया था। इस शासनादेश के अनुसार, CMHO और सिविल सर्जन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर प्रभार देने का अधिकार राज्य शासन (मंत्रालय) ने अपने पास सुरक्षित रखा है और जिला कलेक्टरों के इस अधिकार पर रोक लगी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कर्मचारी हित और वेतन भुगतान के नाम पर कलेक्टर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय ले सकते हैं?
1.38 करोड़ की नोटशीट पर ‘ब्रेक’: कलेक्टर ने तलब की फाइल
डॉ. अनुराग शर्मा ने प्रभार संभालते ही जिस तेजी से काम शुरू किया, उसने भी संदेह पैदा कर दिए। सूत्र बताते हैं कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया के बजाय प्रभारी CMHO ने 1.38 करोड़ रुपये के दवा और उपकरण खरीदी का खाका तैयार कर उसकी नोटशीट आगे बढ़ा दी।
| तिथि | घटना |
| 16 जनवरी 2026 | उच्च न्यायालय द्वारा प्रभार के मामले में स्थगन आदेश जारी। |
| 19 फरवरी 2026 | कलेक्टर द्वारा डॉ. अनुराग शर्मा को प्रभारी CMHO नियुक्त करने का आदेश। |
| 23 फरवरी 2026 | डॉ. आर.बी. चौधरी द्वारा कलेक्टर को अवमानना की चेतावनी का आवेदन। |
| फरवरी अंत | 1.38 करोड़ की खरीदी फाइल कलेक्टर द्वारा जब्त/तलब की गई। |
| 06 मार्च 2026 | उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई। |
जैसे ही यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में आया, प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। सूत्रों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय ने प्रभारी CMHO डॉ. अनुराग शर्मा को फाइल सहित तलब किया। दवा-उपकरण क्रय से संबंधित सभी नोटशीट और फाइलें प्रशासन ने अपने पास रखवा ली हैं। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने मौखिक रूप से डॉ. शर्मा को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें ‘खरीदी’ करने के लिए नहीं, बल्कि आवश्यक वित्तीय कार्यों (वेतन आदि) के लिए प्रभार दिया गया था।
मुकदमों के जाल में फंसा स्वास्थ्य विभाग
रीवा का स्वास्थ्य विभाग वर्तमान में कानूनी पेंच में बुरी तरह उलझा हुआ है,
पहली अवमानना: डॉ. चौधरी ने पूर्व में डॉ. यत्नेश त्रिपाठी के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर कर रखी है, क्योंकि स्टे ऑर्डर के बावजूद डॉ. त्रिपाठी आदेश जारी कर रहे थे।
दूसरी अवमानना की तैयारी: अब कलेक्टर और डॉ. अनुराग शर्मा के विरुद्ध नई कानूनी लड़ाई की बिसात बिछ गई है।
जनता का नुकसान: अधिकारियों की इस आपसी खींचतान और ‘कुर्सी युद्ध’ के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों का वेतन और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाएं फाइलों में दबी हुई हैं।
