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दिल्ली-NCR ‘गैस चैंबर’ में तब्दील: प्रदूषण ने तोड़ा रिकॉर्ड, जनजीवन पर संकट

Published: October 22, 2025

नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार खत्म होते ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा एक बार फिर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो गई है। आतिशबाजी और पराली जलने के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘खतरनाक’ स्तर को पार कर गया है, जिसने स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI का स्तर 500 के पार दर्ज किया गया है, जो कि सबसे गंभीर श्रेणी है। धुएँ और धुंध की मोटी चादर ने पूरे एनसीआर को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे दृश्यता (Visibility) भी काफी कम हो गई है।

प्रदूषण का रिकॉर्ड स्तर: क्यों बिगड़े हालात?
दिवाली के अगले दिन ही प्रदूषण का यह भयावह स्तर सामने आना, कई कारणों का संयुक्त परिणाम है:
अत्यधिक आतिशबाजी: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद, दिल्ली और आसपास के इलाकों में दीपावली की रात जमकर पटाखे जलाए गए। पटाखों से निकलने वाला विषैला धुआँ (पार्टिकुलेट मैटर) हवा में घुल गया।
पराली का धुआँ: पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। हवा की धीमी गति के कारण यह धुआँ दिल्ली की ओर आ रहा है, जिससे प्रदूषण में बड़ा योगदान मिल रहा है।
मौसम की भूमिका: ठंड बढ़ने के साथ ही हवा की गति धीमी हो गई है। इससे प्रदूषक कण (PM 2.5 और PM 10) हवा के निचले वातावरण में फँस जाते हैं और आसानी से छँट नहीं पाते, जिससे धुंध (Smog) की स्थिति पैदा हो जाती है।

AQI का 500 से ऊपर जाना यह दर्शाता है कि हवा में प्रदूषकों की मात्रा इतनी अधिक है कि यह स्वस्थ लोगों को भी बीमार कर सकती है, जबकि पहले से बीमार लोगों के लिए यह अत्यंत जानलेवा साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
प्रदूषण के इस रिकॉर्ड स्तर का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डॉक्टर्स ने इसे स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति बताया है।
साँस संबंधी समस्याएँ: बच्चों और बुजुर्गों में साँस लेने में कठिनाई, अस्थमा के दौरे और गले में जलन की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। अस्पतालों में श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
आँखों में जलन: हवा में मौजूद विषैले तत्वों के कारण लोगों की आँखों में तेज जलन और पानी आने की शिकायतें आम हो गई हैं।
दीर्घकालिक प्रभाव: लंबे समय तक ऐसे जहरीले माहौल में रहने से फेफड़ों के कैंसर और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

सरकारी दावों और कार्रवाई पर सवाल
प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुँचने के बाद, एक बार फिर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ताधारी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर कार्रवाई न करने और चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगा रहे हैं।
कार्रवाई की औपचारिकता: पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकारें हर साल केवल औपचारिक कार्रवाई करती हैं, जैसे कि निर्माण कार्यों पर आंशिक प्रतिबंध और ‘एंटी-स्मॉग गन’ का इस्तेमाल, जो प्रदूषण की जड़ पर काम नहीं करता।

समाधान की मांग: विशेषज्ञों ने पराली प्रबंधन के लिए प्रभावी दीर्घकालिक समाधान लागू करने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और नागरिकों को मास्क पहनने तथा घरों के अंदर रहने की सलाह दी है।
जब तक सभी राज्य और केंद्र सरकार मिलकर समन्वित और सख्त कदम नहीं उठाते, तब तक दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को हर साल त्यौहारों के बाद इसी जहरीली हवा में जीने को मजबूर होना पड़ेगा।

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