मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहा धार्मिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। वसंत पंचमी के अवसर पर पूजा और नमाज को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच मतभेद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर दिया है। इस फैसले को धार्मिक संतुलन और शांति बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

क्या है भोजशाला विवाद का इतिहास
धार स्थित भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे माता सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल परमार वंश के राजा भोज के समय से जुड़ा हुआ है। यहां प्राचीन शिलालेख और स्थापत्य कला के अवशेष भी मिले हैं। समय के साथ यह स्थल दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र बन गया, जिससे विवाद गहराता चला गया।
वसंत पंचमी को लेकर क्यों बढ़ा विवाद
वसंत पंचमी हिंदू धर्म में माता सरस्वती की पूजा का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन भोजशाला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचते हैं।
हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में मांग की थी कि वसंत पंचमी के दिन केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए। उनका तर्क था कि यह दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजा से जुड़ा है।
वहीं मुस्लिम पक्ष ने नमाज के लिए समय निर्धारित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि वर्षों से यहां नमाज अदा की जाती रही है और इसे रोका नहीं जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है। इसलिए वसंत पंचमी के दिन पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग समय तय किया जाएगा।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक:
* तय समय पर हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति मिलेगी
* निर्धारित समय में मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करेगा
* दोनों गतिविधियों के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे
अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बनने दी जाए।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अफवाह या भड़काऊ गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
हिंदू पक्ष ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कम से कम उन्हें पूजा का निर्धारित समय मिल गया है। उनका मानना है कि यह उनकी धार्मिक आस्था के सम्मान की दिशा में एक कदम है।
वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी अदालत के फैसले को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि नमाज की अनुमति मिलना उनके अधिकारों की रक्षा करता है।
हालांकि, दोनों पक्षों के कुछ संगठनों ने इसे अस्थायी समाधान बताया है और स्थायी निर्णय की मांग दोहराई है।
वसंत पंचमी को लेकर क्यों बढ़ा विवाद
सामाजिक सौहार्द पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में संतुलित फैसले सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद करते हैं। अलग-अलग टाइमिंग तय करने से टकराव की आशंका कम होती है और दोनों समुदायों की भावनाओं का सम्मान भी होता है।
धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धार्मिक सहिष्णुता और कानून-व्यवस्था की मिसाल माना जा रहा है। वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग समय तय कर अदालत ने टकराव की संभावना को कम करने की कोशिश की है। अब यह प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इस फैसले का पालन कर शांति और भाईचारे को बनाए रखें।
