EDII परिसर में राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह का आयोजन, सहकारिता आंदोलन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

EDII परिसर में राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह का आयोजन, सहकारिता आंदोलन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
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एंटरप्रेन्योरशिप इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद ने अमूल और इफ्को के सहयोग से शुक्रवार को ईडीआईआई परिसर में राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह मनाया। इस अवसर पर ‘प्रमोटिंग एंटरप्रेन्योरशिप थ्रू को-ऑपरेटिव मूवमेंट’ विषय पर उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। 
अमूलफेड डेयरी, गांधीनगर, गुजरात के जनरल मैनेजर अनिल कुमार बयाती इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए, जबकि इफ्को, कलोल, गांधीनगर, गुजरात के चीफ मैनेजर (मार्केटिंग) पी एम मेवा और चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना (सीआईएमपी), पटना, बिहार के डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) राणा सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की। 
इस अवसर पर ईडीआईआई ने चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक पेशेवरों ने सहकारिता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी सहभागिता निभाई। साथ ही, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल, उदयभानसिंहजी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ को-ऑपरेटिव मैनेजमेंट, गांधीनगर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय, ग्वालियर, उड़ान ट्रस्ट ऑफ सोशल वर्क, विश्वकर्मा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदाबाद के छात्र भी इसमें शामिल हुए। अनेक स्टार्टअप्स, शिक्षाविद, उद्यमी और नीति निर्माताओं ने भी इसमंे भागीदारी की। 
edअमूलफेड डेयरी, गांधीनगर, गुजरात के जनरल मैनेजर अनिल कुमार बयाती ने अमूल की कामयाबी की चर्चा की और कहा, ‘‘सहकारी डेयरी विकास के लिए अमूल एक रोल मॉडल है। अमूल की भावना को अन्य स्थानों पर भी लागू करने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की गई और मॉडल को सफलतापूर्वक दोहराया गया। अमूल सहकारी प्रणाली में विश्वास का प्रतीक है जो किसानों के हाथों में विकास की कुंजी सौंपता है।’’ इफ्को, कलोल, गांधीनगर, गुजरात के चीफ मैनेजर (मार्केटिंग)  पीएम मेवा ने कहा, ‘‘दुनिया भर में, सहकारी समितियों ने अपने देशों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समाज के विकास को प्रभावित किया है। यह एकमात्र आंदोलन था जो सभी सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम था और एक विजयी रणनीति के रूप में उभरा। यह एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सशक्तिकरण की ओर ले जाता है।’’ चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना (सीआईएमपी), पटना, बिहार के डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) राणा सिंह ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुशासन के रूप में सहकारी प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘सहकारी संस्थाओं को व्यावहारिक होने और अपने सदस्यों को उनकी ताकत और विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर सशक्त बनाने के लिए हमेशा कुछ नया सोचना चाहिए। सहकारी उद्यम एक ऐसा डोमेन है जिसके लिए इनोवेटिव विचारों की आवश्यकता होती है, क्योंकि इन उद्यमों को भी गलाकाट प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।


 EDII’’ ईडीआईआई के डायरेक्टर जनरल डॉ सुनील शुक्ला ने कहा, ‘‘सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के साथ अब सहकारी समितियों के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नियामक ढांचा तैयार किया गया है। अब हमारे देश में सहकारी आंदोलन पर अत्यधिक ध्यान दिया जाने लगा है। सामाजिक पूंजी वित्तीय पूंजी की तरह ही महत्वपूर्ण है और सामाजिक पूंजी का लाभ उठाने के लिए सहकारी आंदोलन पर निर्भर रहने की रणनीति को अपनाया जाता है। अमूल और इफ्को सहकारिता के मूल दर्शन के साथ आगे बढ़ते हैं अर्थात लोगों का सशक्तिकरण, भागीदारी प्रबंधन, निर्णय लेने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और लोगों का कल्याण करना।’’ 
उद्घाटन के बाद ‘इमर्जिंग अपॉर्च्युनिटीज इन को-ऑपरेटिव एंटरप्रेन्योरशिप’ विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। पैनलिस्टों में श्री राजीव पाडिया, मैनेजिंग डायरेक्टर (सेवानिवृत्त), गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक और मैनेजमेंट कंसल्टेंट और एडवाइजर, डॉ. अंजनी कुमार अस्थाना, डायरेक्टर, उदयभानसिंहजी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ को-ऑपरेटिव मैनेजमेंट, गांधीनगर, गांधीनगर, गुजरात; डॉ. अमित द्विवेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, ईडीआईआई, अहमदाबाद और श्री श्रीकांत कुमार, एंटरप्रेन्योरशिप एक्सपर्ट के नाम प्रमुख हैं। इस दौरान सहकारिता आंदोलन के माध्यम से समाज को होने वाले फायदों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही, देश के भीतर और बाहर अर्थव्यवस्था और बाजारों के बदलते स्वरूप को देखते हुए, पैनलिस्टों ने सहकारी समितियों को अपने दृष्टिकोण में नयापन लाने और उन्हें और अधिक रणनीतिक और उद्यमशील होने पर जोर दिया।