कान्हा टाइगर रिजर्व में हाथियों ने मनाई पिकनिक: सात दिन तक तेल मालिश और खाने को मिला फल, गन्ना, केला नारियल

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कान्हा टाइगर रिजर्व में हाथी रिजुवेनेशन कैंप सात दिन तक चला. इस कैंप में पार्क के हाथियों को पूरी तरह से विश्राम दिया जाएगा था। उनकी विशेष खातिरदारी की गई. नीम और अरंडी के तेल से मालिश की गई और गन्ना, केला, मक्का, अनानास, नारियल खिलाएं गए. पूरे साल कान्हा टाइगर रिज़र्व की सुरक्षा में एहम योगदान देने वाले हाथियों के लिए यह कैंप काफी खास होता है। इस दौरान उनसे कोई काम तो नहीं लिया जाता लेकिन उनकी ख़ातिदार का पूरा ख्याल रखा जाता है। कैंप में हाथियों को पूरी तरह से आराम दिया जाता है और उन्हें उनके पसंदीदा व्यंजन परोसे जाते है। कैंप के दौरान कान्हा के अलग-अलग जोन के हाथियों को एक साथ रखा जाता है जिससे उन्हें आपस में घुलने-मिलने का मौका मिलता है। हाथियों के साथ उनके चारा कटर और महावत भी उनके साथ रहते है।

फील्ड डायरेक्टर एस.के सिंह ने बताया कि कैंप में पार्क के 16 हाथी शामिल है। कान्हा टाइगर रिज़र्व में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 18 हाथी है लेकिन इस कैंप में 16 हाथियों को शामिल किया गया है। 4 हाथियों को अलग-अलग वजहों से इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस कैंप शामिल सबसे बड़े हाथी की उम्र 78 वर्ष सबसे है और छोटे हाथी की उम्र महज 5 सप्ताह है। दरअसल हाथी एक सामाजिक प्राणी है वह झुण्ड में रहना पसंद करता है। यह कैंप मौका होता है हाथियों आपस में मेल मिलाप और जोड़ी बनाने का। न सिर्फ हाथी बल्कि उनके महावत और चारा कटर भी हाथियों के साथ होते है। हाथियों के साथ - साथ इनका भी पूरा मेडिकल चेकअप होता है। इनके ब्लड सैंपल लिए जाते है। हाथियों को पानी में खेलना बहुत पसंद है। यही वजह है कि कैंप दौरान हाथियों को नदी या तालाब में नहलाया जाता है। उनके नाखूनों को काटा जाता है, दांतों को तराशा जाता है और तेल से मसाज दी जाती है।

कैंप के दौरान हाथियों को नारियल, अनानास, संतरा, केला, सेब, पपीता, गन्ना, रोटी और गुड़ परोसा जाता है। इन सामाजिक प्राणियों को एक साथ समय बिताने का यह अनोखा अवसर प्राप्त होता है। जो उनकी वंशवृद्धि में भी सहायक है। इस कैंप में सबसे छोटा हाथी 5 सप्ताह का है, जो निर्मला हाथी का बच्चा है। सबसे उम्र दराज़ हाथी की उम्र 78 साल है, लेकिन ऐसे हाथी जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है, हम उनसे काम नहीं लेते, क्योंकि उनके भी रिटायरमेंट का नियम है। कैंप के बाद हाथी बार फिर हाथी साल भर की थकावट को भूल नई ऊर्जा व ताज़गी लेकर फिर काम पर लौट जाते है। ऐसे कैंप के आयोजन से एक ओर जहां हाथियों में नई ऊर्जा का संचार होगा। मानसिक आराम मिलता है, वहीं पार्क के पांच अलग-अलग रेंज कान्हा, किसली, सरही, मुक्की एवं सूपखार से आए।