व्यापारी ने भगवान श्रीकृष्ण से कराई बेटी की शादी, चार दिन तक चलीं रस्में, जानिए क्यों हुई यह अनोखी शादी

ग्वालियर में एक पिता ने अपनी बेटी की रचाई अनोखी शादी 
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The businessman got his daughter married to Lord Krishna

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक पिता ने अपनी बेटी की अनोखी शादी की है, जो इन दिनों खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। शादी की पूरी तैयारी की गई सभी रस्में भी निभाई गई। बाकायदे रिश्तेदारों को न्यौता भी दिया गया। शादी के दिन दरवाजे पर बारात भी आई बाराती खूब नाचे भी। हालांकि जब रिश्तेदारों को न्यौता मिला तो शादी का कार्ड देखकर उन्हे हैरत जरूरत हुई। मंडप में जब जयमाला का वक्त आया तो व्हील चेयर पर दुल्हन पहुंची लेकिन वहां पर दूल्हा नजर नहीं आ रहा था। वहां बैठे सभी लोग दूल्हे की राह तक रहे थे। इतने भी भगवान श्रीकृष्ण (प्रतिमा) बन कर पहुंचे। भगवान को सिंहासन पर विराजा गया और फिर उसके बाद शादी की सभी रस्में पूरी की गईं। 

आखिर क्यों हुई ऐसी शादी?
दरअसल ग्वालियर के मोहना निवासी शिशुपाल राठौर एक व्यापारी हैं, बिल्डिंग मटेरियल का उनका काम है। उनकी बड़ी बेटी सोनल (26) एक गंभीर बीमारी से ग्रसित है। सोनल को ल्यूकोडिस्ट्रॉफी नामक बीमारी है। बताया गया है कि यह एक अनुवांशिकी बीमारी है। इस बीमारी में पीडि़त का शरीर रिस्पॉन्स नहीं करता है। बता दें कि शुरू से ही सोनल ऐसी नहीं थी, 5 साल तक आम बच्चों की तरह वह भी मस्ती किया करती थी, लेकिन इसके बाद से धीरे-धीरे उसका काम करना कम कर दिया। डॉक्टर को दिखाने पर बीमारी के बारे में  पता चला। साल 2019 तो पूरे शरीर ही काम करना बंद कर दिया। बेटी को इस हालत में देख पिता काफी दुखी रहने लगे। इसी दौरान उन्हें किसी ने बताया कि शायद शादी के बाद यह बीमारी ठीक हो जाए। तो उन्होंने बेटी की शादी करने का मन बना लिया।

दो दिनों में पूरी की शादी की सारी तैयारियां पूरी
पिता शिशुपाल राठौर ने 6 नवंबर को सभी रिश्तेदारों को फोन कर 7 नवंबर को बेटी की शादी के लिए आमंत्रित किया। सभी रिश्तेदार भी शादी का निमंत्रण पाकर हैरान रह गए। कुछ लोगों ने तो पूछा भी कि  शारीरिक रूप से अक्षम बेटी से कौन युवक शादी कर रहा है।

दरवाजे पर आई बारात, हुईं सभी रस्में
सोनल की शादी में पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हल्दी, मेंहदी, संगीत सभी रस्में निभाई गईं। सोनल को ब्याहने खुद भगवान श्रीकृष्ण बारात लेकर पहुंचे। घरवालों ने बाकायदे बारात का स्वागत किया। बारातियों ने जमकर डांस किया। वरमाला व फेरे के बाद बेटी की विदाई हुई। बेटी की विदाई पर माता-पिता के साथ ही जिसने भी यह दृश्य देखा सभी के आंसू निकल आए। विदा होकर सोनल अपने पति के साथ कृष्ण मंदिर पहुंची, जहां से भाई वापस उसे घर लेकर आया।
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अब भगवान श्रीकृष्ण ही सहारा
राठौर ने बताया कि सोनल से पहले उनके सात साल के बेटे को भी यह गंभीर बीमारी थी, जो अब इस दुनिया में नहीं है। यह अनुवांशिक बीमारी लाइलाज है। बेटी को जीवन में थोड़ी खुशी देने के लिए यह सब किया। लोगों ने भी कहा कि भगवान से शादी कर दो, तो हो सकता है कुछ राहत मिले। उनकी बातों को सुनकर मुझे भी लगा कि शादय ईश्वर की कृपा हो जाए। जिसके बाद यह शादी का यह कार्यक्र किया।