insurance tips: बाइक व स्कूटर का बीमा कराते समय बस इन बातों का दें ध्यान, फुल कवरेज के साथ मिलेंगे और भी कई फायदे

स्कूटर और बाइक सहित अन्य वाहनों का बीमा करना है बेहद जरूरी
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Bike and Scooter Insurance

स्कूटर और बाइक सहित अन्य वाहनों का बीमा करना बेहद जरूरी है। यदि बिना बीमा के गाड़ी चलाते पकड़े गए तो भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। वहीं, अगर किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो बाइक या सामने वाले की गाड़ी को नुकसान पहुंचता है, तो इसका पूरा खर्च आपको पड़ता है। इन सब नुकसान से बचने के लिए गाडिय़ों का इंश्योरेंस कराना जरूरी है।
गाडिय़ों का बीमा दो तरीके से होता है- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व कम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस। कार या बाइक का इंश्योरेंस को लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे आपको इंश्योरेंस का पूरा कवरेज मिल सकेगा। इन टिप्स का रखें ध्यान-

सही बीमा का करें चयन
बीमा लेने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह बीमा कंपनी कवरेज कितना देती है। बता दें कि कम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस या डैमेज कंट्रोल बीमा दुर्घटना होने पर सिर्फ बाइक या स्कूटर को हुए नुकसान की ही भरपाई करती है। वहीं, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने पर आपकी गाड़ी के साथ ही सामने वाले चालक को हुए नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाती है। इसलिए, बीमा लेते समय थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का चुनाव करना ही सही समझा गया है।

लंबे समय के लिए लें बीमा
सामान्यतौर पर लोग सालभर के लिए गाड़ी का बीमा करवाते हैं। लेकिन कुछ बीमा कंपनियां लंबे समय के इंश्योरेंस पर अतिरिक्त बेनेफिट देती है। जैसे कि बीमा की अवधि के दौरान चालक यदि कोई क्लेम भी करते हैं, तब भी नो-क्लेम बोनस का बेरीफिट लिया जा सकता है। इसके अलावा बार-बार इंश्योरेंस को रिन्यू करने की झंझट भी नहीं रहेगी।

ऐड ऑन सर्विस
ऐड ऑन सर्विस खास कम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में मिलती है। बहुत-सी बीमा कंपनियां बीमा कराते समय कुछ ऐड ऑफ सर्विस अपने ग्राहकों को ऑफर करती हैं।  इसमें 24*7 असिस्टेंस सर्विस, इंजन और गियरबॉक्स प्रोटेक्शन कवरेज, लॉक रिप्लेसमेंट कवरेज जैसी अन्य सुविधाएं दी जाती है। अत: बीमा लेते समय यह जान लेना जरूरी है कि कुछ ऐड ऑन सर्विस दी जा रही है या नहीं।

कैशलेस इलाज कराने की सुविधा
कुछ बीमा कंपनियां कैशलेश हॉपिटलाइजेशन यानी दुर्घटना पर बिना पैसे खर्च किए इलाज करवाने की सुविधा देती है। यह सुविधा ऐड ऑन सर्विस के तहत मिलती है। बीमा के वक्त यह पता कर लें कि बीमा कंपनी अस्पताल के खर्च का पूरा जिम्मा उठाएगी या नहीं।