Rewa News: विंध्य का जगन्नाथ मंदिर में यह उपाय करने जल्द होती है शादिया

रीवा महाराज ने जगन्नाथपुरी से तपस्या कर लाई थी दिव्य मूर्तियां, पुरी जैसा है महात्म
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रीवा महाराज ने जगन्नाथपुरी से तपस्या कर लाई थी दिव्य मूर्तियां, पुरी जैसा है महात्म

विंध्य भास्कर डेस्क। इन दिनों शादियों को सीजन शुरु हो गया है। ऐसे में आपको विंध्य के ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे मे बता रहे हैं। जहां शादियों की  अड़चन समाप्त हो जाती है। इतना ही  नहीं  युवतियों को मंदिर की परपंरा अनुसार उपाय करने से उन्हें मनचाहा पति मिलता है। विंध्य के इस मंदिर में आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या मेंं लोग आते हैं।  

इसके लिए मंदिर में एक विशेष उपाय करना होता है। मंदिर के पुजारी नरेन्द्र द्विवेदी बताते है कि इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ की कृपा से  यहां जो  युवती जिनका की विवाह में किसी भी प्रकार की दिक्कत आती है प्रतिमा मे मूयरी  या मोर पंख लगा हुआ मुकु ट चढ़ाने से जल्द विवाह हो जाते है और मनचाहा फल मिलता है। अब तक बढ़ी संख्या में युवतियों को मयूरी चढ़ाने के बाद उनके जल्द विवाह के संयोग बने है। बता दें कि शहर के बिछिया नदी के किनारे स्थित मंदिर को रीवा के महाराजा रघुराज सिंह ने बनाया था। मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाएं दिव्य को सोने से रथ से रीवा लाया गया था। इसके बाद महाराजा ने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा कई स्थानों पर लाकर स्थापित करवाई। इतना ही नहीं इस मंदिर की पूजा के लिए संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना कार्रवाई है।

विंध्य का जगन्नाथ मंदिर में यह उपाय करने  जल्द होती है शादिया 
रीवा महाराज ने जगन्नाथपुरी से तपस्या कर लाई थी दिव्य मूर्तियां, पुरी जैसा है महात्म

जगन्नाथ पुरी से जुड़ा है इन प्रतिमाओं का रिश्ता
विंध्य में स्थापित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं को रिश्ता हिंदू धर्म के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भगवान जगन्नाथ से जुड़ा है। बताया जाता है कि रीवा के महाराजा पुरी में भगवान की दर्शन के लिए गए थे। वहां उन्होंने भगवान के प्रसाद को लेने से इंकार कर दिया है इसके बाद ही वह रोग ग्रस्त हो गए है। ततपश्चात उन्होंने भगवान जगन्नाथ मंदिर में ही कठिन तप किया। इसके बाद वह निरोग्य होने पर रीवा लौटे और इसके बाद भगवान्न जगन्नाथ की प्रतिमा को रीवा लाए। पुरी में विराजित प्रतिमाओं को प्रत्येक पंाच वर्ष में बदला जाता है। इन्हीं प्रतिमाओ को रीवा में लाकर स्थापित किया गया।