बिहार की दबंगई: नर घड़ियाल विहीन हुआ सोन अभयारण्य

सीधी का नर घड़ियाल बहकर पहुंचा बिहार, अब देने से इनकार
लंबे संघर्ष के बाद मुरैना से मिला था नर घड़ियाल
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Bihar's Dabangai: Son Sanctuary without male alligators

विंध्य भास्कर/डेक्स। मघ्य प्रदेश के सीधी जिले का सोन घड़ियाल अभयारण्य एक बार फिर नर घड़ियाल विहीन हो गया है। यहां 6 वर्ष की मशक्कत के बाद विगत वर्ष मुरैना से लाया गया नर घड़ियाल सोन नदी के जोगदह घाट से बिहार राज्य पहुंच गया। वहां बिहार के वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर पकड़ लिया। जब इसकी भनक सोन घड़ियाल अभयारण्य के अधिकारियों को लगी तो आनन-फानन में एक टीम बिहार भेजी गई। वहां वन विभाग ने यह कहकर देने से मना कर दिया कि यह हमारे यहां का घड़ियाल है। बाद में जब घड़ियालों की पूछ पर लगे टैग से इसकी पहचान कराई गई तब यह कहा जाने लगा कि जब मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट से पत्र लिखवाएंगे तभी हम वापसी की कार्रवाई कर पाएंगे। इसके बाद से विभागीय अधिकारी मिनस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट से इस संबंध में पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन अभी वहां से कोई जवाब नहीं आया है।

दूसरे दिन ही पहुंच गई थी सीधी से टीमरू नर घड़ियाल के गायब होने की जानकारी मिलते ही विभाग में हड़कंप मच गया था। उसकी लगातार तलाश की जा रही थी। इसी बीच पता चला कि एक घड़ियाल बिहार-झारखंड राज्य के बॉर्डर में सोन नदी से बहकर कैनाल तक पहुंच गया है। उसका रेस्क्यू ऑपरेशन कर बिहार राज्य की वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया है। 31 अगस्त को घड़ियाल गायब होने की जानकारी मिली थी और 1 सितंबर की शाम टीम बिहार पहुंच गई। वहां बिहार राज्य के अधिकारियों ने घड़ियाल देने से साफ इनकार कर दिया। टैग के साथ ही लगी थी ट्रैकिंग डिवाइसरू अधिकारियों ने बताया कि नर घड़ियाल की पहचान के लिए पूछ पर टैग लगा था। साथ ही ट्रैकिंग डिवाइस भी लगी थी। हालांकि डिवाइस निर्धारित दूरी व पानी की गहराई तक ही काम करती है। इसके कारण उसको त्वरित रूप से ट्रैक नहीं किया जा सका था।


गंडक नदी में छोड़ा गया है घड़ियाल
विभागीय अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू किए गए घड़ियाल को गंडक नदी में छोड़ा गया है। घड़ियाल की लंबाई करीब 17 फिट है। उसका रेस्क्यू करने में भी बिहार के वन विभाग की टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी। घड़ियाल को ले जाने के लिए करीब 20 फिट का लकड़ी का बॉक्स बनाया गया था, जिसे ट्रक में लोड कर ले जाया गया।

घड़ियालों की रुक गई थी वंशवृद्धि
सोन घड़ियाल अभयारण्य में मादा घड़ियाल थे पर नर घड़ियाल नहीं था। इस कारण वंशवृद्धि नहीं हो रही थी। मुरैना से नर घड़ियाल लाने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए गए। बीते साल दिसंबर में सफलता मिली और एक नर घड़ियाल को लाकर सोन नदी के जोगदह घाट में छोड़ा गया था। नर घड़ियाल आने से प्रजनन भी हुआ और मादा घड़ियालों ने करीब 134 बच्चे भी दिए। अब यह नर घड़ियाल पानी के तेज बहाव में बहकर बिहार राज्य पहुंच गया है।

सोन घड़ियाल अभयारण्य का एक मात्र नर घड़ियाल पानी के तेज बहाव में बहकर बिहार राज्य पहुंच गया था, जिसे रेस्क्यू कर पकड़ लिया गया है। हमारी टीम वहां गई थी, लेकिन अधिकारियों ने वापस करने से साफ मना कर दिया। उनका कहना है कि मिनस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट से पत्र आने के बाद ही इसे वापस करेंगे। हमारी तरफ से नर घड़ियाल वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निकुंज पांडेय, अधीक्षक सोन घड़ियाल अभयारण्य सीधी