सीधी-सिंगरौली हाईवे पर डेढ़ दशक बाद भी सुकून भरी यात्रा का सपना अधूरा

आवागमन पर प्रतिबंध: गैमन इंडिया का अधूरा कार्य पूरा करने तिरुपति बिल्डकॉन ने लिया ठेका

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Traffic restrictions: Tirupati Buildcon took up the contract to complete the unfinished work of Gammon India

सिंगरौली. सीधी-सिंगरौली हाईवे पर 108 किलोमीटर में सुरक्षित व सुकून भरी यात्रा का सपना डेढ़ दशक बाद भी अधूरा है। वर्ष 2018 में ठेका कंपनी गैमन इंडिया द्वारा छोड़े गए हाईवे के अधूरे कार्य का पूरा करने की जिम्मेदारी नई ठेका कंपनी तिरुपति बिल्डकॉन ने ले तो ली है, लेकिन काम पुराने ठेका कंपनी के ढर्रे पर ही कर रही है। नई कंपनी की सुस्त कार्यप्रणाली का नतीजा यह है कि पूरी तरह से खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हाईवे पर आवागमन को प्रतिबंधित करना पड़ा है। हाईवे को पूरा करने के लिए नई कंपनी ने 331.16 करोड़ में ठेका लिया है। कार्य पूरा करने की डेडलाइन अप्रेल 2023 निर्धारित की गई है। यह बात और है कि काम शुरू हुए एक वर्ष व्यतीत होने को है और अभी एक तिहाई काम भी पूरा नहीं हो सका है।

अभी एक भी रूट नहीं हो सका तैयार: हाईवे की फोरलेन सड़क बनाने की जिम्मेदारी लेने वाली ठेका कंपनी अभी तक एक भी रूट की सड़क तैयार नहीं कर सकी है। मोरवा से लेकर गोपद नहीं पुल के आगे तक एक साथ कई स्थानों पर कार्य शुरू किया गया है, लेकिन अभी तक कहीं भी कार्य पूरा नहीं किया जा सका है।

हाईवे पर सजहर के जंगल में सड़क घंस गई है। सुरक्षा के मद्देनजर आवागमन प्रतिबंधित कर विकल्प के तौर पर दूसरी व्यवस्था बनाई है। ठेका कंपनी को तेजी के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है। उम्मीद है कि निर्धारित अवधि में हाईवे तैयार हो जाएगा। राजीव रंजन मीना, कलेक्टर


हाईवे पर पूरा करना है ये बड़े काम

  • कंपनी को कर्थुआ, बरगवां बस्ती, गोंदवाली, गोरबी व सिंगरौली रेलवे स्टेशन में बायपास बनाया जाना है।
  • डगा, बरगवां, गोरबी व मोरवा में रेलवे ओवर ब्रिज और मोरवा में ही भूसा मोड़ में एक अंडर ब्रिज बनाना है।
  • सीधी से लेकर सिंगरौली के बीच हाइवे पर आधे-अधूरे करीब एक दर्जन पुल व पुलिया का निर्माण करना है।

मरम्मत के नाम पर बहा दिए 16 करोड़
हाईवे के निर्माण के दौरान आवागमन में कोई समस्या न हो। इसके लिए प्रशासन ने सड़कों को दुरुस्त कराने का निर्णय लिया। पिछले वर्ष 16 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों की मरम्मत का कार्य कराया गया, लेकिन मरम्मत का कार्य करने वाली ठेका कंपनी ने केवल खानापूर्ति की। यही वजह रही कि इस बारिश में सड़क धंस गई और प्रशासन को दो दिन पहले आवागमन प्रतिबंधित करना पड़ा।

प्रशासन का निर्देश भी हुआ हवा
सुरक्षित यात्रा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गोपद नदी के पुल को प्राथमिकता के तौर पर तेजी के साथ बनाए जाने का निर्देश दिया है। निर्देश जारी हुए छह महीने से अधिक का समय व्यतीत हो गया है, लेकिन अभी तक कंपनी पुल पर एक रूट भी चालू नहीं कर सकी है।

  • वर्ष 2004 में सीधी-सिंगरौली हाइवे निर्माण को यूपीए सरकार ने बजट स्वीकृत किया था।
  • मनमोहन सिंह भूतल परिवहन मंत्री रहे कमलनाथ ने 400 करोड़ रुपए स्वीकृत कराए थे।
  • प्रस्तावित बजट का 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार को देना था।
  • केंद्र से बजट स्वीकृत होने के बाद प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यहां आकर हाइवे का उद्घाटन किया था।
  • हाइवे निर्माण की जिम्मेदारी गेमन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. को प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपए बजट में दी गई थी।
  • ठेका होने के बाद ठेका कंपनी ने पेटी कांट्रैक्टर के रूप में टेक्नोटेक इंफ्राटेक प्रा. लि. को निर्माण की जिम्मेदारी दे दी।
  • पेटी कांट्रैक्टर को निर्माण के लिए जमीन देने में लंबा वक्त गुजर गया और वर्ष 2013 में कार्य शुरू हुआ।
  • अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर जमीन उपलब्ध होने में देरी के चलते निर्माण शुरू करने ठेका कंपनी ने महंगाई का हवाला देते हुए रेट रिव्यू करने की बात की।
  • ठेका कंपनी ने प्राप्त करीब 500 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद बजट नहीं होने का हवाला देते हुए काम बंद कर दिया।
  • पिछले वर्ष फरवरी में दूसरी ठेका कंपनी तिरुपति बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड को 331 करोड़ रुपए में ठेका दिया गया है। करीब एक वर्ष पहले कार्य शुरू किया गया, लेकिन अभी एक तिहाई भी पूरा नहीं हो सका है।