REWA : हर महीने लाखों खर्च के बाद भी जिले में कुपोषण का नहीं मिट रहा कलंक

जिले में नौ हजार बच्चे कुपोषण से ग्रसित

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रीवा जिले में महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक नौ हजार बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। हर महीने की 11 तारीख से वजन करने का विशेष अभियान चलाया जाता है। गंभीर कुपोषित बच्चे जो सैम कैटेगरी में चिन्हित हैं, उनकी संख्या जिले में 2517 बताई गई। वहीं मध्यम कुपोषित(मैम) की संख्या 6471 है। विभाग का दावा है कि पूर्व से कुपोषित बच्चों की रिकवरी भी तेजी से हुई है। जनवरी से लेकर बीते महीने तक 3363 बच्चे मध्यम कुपोषण से सामान्य हुए। दावा है कि नए मिले कुपोषण का यह 52 प्रतिशत है। इसी तरह गंभीर कुपोषण से मध्यम कुपोषण की संख्या 687 और मध्यम कुपोषण से सामान्य हुए मरीजों में 853 शामिल हैं।

महीनों से टीएचआर का वितरण नहीं
रीवा में लंबे समय से टीएचआर का वितरण नहीं किया जा रहा है। पहले अब तक भोपाल से सप्लाई होती थी कि विलंब से पहुंचने या आवंटन देर से होने जैसे बहाने विभाग की ओर से बनाए जाते थे लेकिन जब से पहड़िया रीवा में प्लांट बनाया गया है। कहा जा रहा है कि प्लांट को खाद्यान्न ही समय पर नहीं मिलता जिसकी वजह से टेक होम राशन नहीं पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों से जानकारी मिली है कि जनवरी के बाद टीएचआर की सप्लाई बंद थी। अगस्त में उपलब्ध कराया गया है जो जून का है। शेष महीनों का टीएचआर कहां गया, यह विभाग नहीं बता पा रहा है। साथ ही तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्व सहायता समूहों द्वारा जो खाद्यान्न दिया जाता है वह भी कई परियोजनाओं में महीनों से वितरित नहीं किया गया है।

जिले में कुपोषण का आंकड़ा कम करने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही है। लगातार मिल रहे नए कुपोषितों की संख्या चिंताजनक बनती जा रही है। वर्षों की बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने के लिए कलेक्टर मनोज पुष्प ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में कई नवाचार भी किए हैं।
इसके लिए जिले के सभी 3434 आंगनबाड़ी केन्द्रों को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं समाजसेवियों ने गोद ले रखा है। उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे परिणाम सुधरेंगे लेकिन हालात पहले की तरह ही बने हुए हैं। हाल ही में आए कुपोषित बच्चों की संख्या के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। इन दिनों कुपोषितों की संख्या पर सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि यहां पर टेक होम राशन का वितरण नियमित रूप से नहीं हो रहा है। विभाग का दावा है कि टीएचआर का नियमित वितरण हो रहा है लेकिन हाल ही में सीएजी की आई रिपोर्ट ने रीवा जिले में भी पोषण आहार परिवहन में घोटाला होने का उल्लेख किया है, जिसके चलते अब बढ़ते कुपोषण पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
फैक्ट फाइल

  • छह माह से तीन वर्ष के बच्चों की संख्या- 121870 (लाभार्थी-94761)
  • तीन से छह वर्ष के बच्चे-113841 ( लाभार्थी-102834)
  • गर्भवती महिलाएं- 20039
  • धात्री महिलाएं- 16963
  • गंभीर कुपोषित बच्चे- 2517
  • मध्यम कुपोषित बच्चे- 6471