MP : विद्युत दुर्घटना हुई तो बिजली अधिकारी-कर्मचारियों पर दर्ज होगा हत्या का प्रकरण

धारा 304 के तहत थाने में दर्ज कराया जाएगा मामला, प्रमुख सचिव ऊर्जा ने विद्युत दुर्घटनाओं पर रोक लगाने जारी किए निर्देश, कर्मचारियों ने किया विरोध, यूनाइटेड फोरम ने दी आंदोलन की चेतावनी

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विद्युत लाइनों में गड़बड़ी, खंभों में करंट उतरने या तार टूटने से फील्ड में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर वहां पदस्थ विधुत अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध धारा 304 ए के तहत गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाएगा। इसके निर्देश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे ने दिए हैं। क्षेत्र में विद्युत लाइनों के चपेट में आने एवं खंभों में करंट उतरने की घटनाओं से जनहानि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। करंट की चपेट में आने से पशुओं की मौत होने पर सरकार को पशुपालकों को मुआवजा देना पड़ता है। कंपनी को अर्थिक नुकसान हो रहा। जिसे देखते हुए प्रमुख सचिव ने अधिकारी कर्मचारियों पर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

प्रमुख सचिव ऊर्जा के निर्देशों को यूनाइटेड फोरम ने संज्ञान में लेकर वर्चुअल विमर्श कर निर्देश का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया। चेतावनी दी गई कि प्रदेश में कहीं पर भी किसी भी अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध दुर्घटना पर धारा 304 का प्रकरण दर्ज किया जाता है तो तत्काल उस क्षेत्र में विधुत अधिकारी-कर्मचारी कार्य का बहिष्कार करेंगे और सम्पूर्ण प्रदेश में भी आवश्यक हुआ तो विरोध दर्ज किया जाएगा।

विद्युत दुर्घटना होने पर उस क्षेत्र के बिजली अधिकारी कर्मचारी को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज करने प्रमुख सचिव के निर्देश का कंपनी के अधिकारी-कर्मचारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि शासन की प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं एवं अधोसंरचना में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर नियमित अनुभवी कर्मचारियों की भारी कमी है। जिससे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत दयनीय स्थिति में है।

विद्युत मेंटीनेंस का कार्य आउटसोर्स और गैर प्रशिक्षित कर्मचारियों से कराना प्रबंधन की दिशाहीनता एवं लापरवाही को दर्शाता है। बिजली कंपनी में अनुभवी नियमित कर्मचारियों की भारी कमी के कारण जहां विद्युत व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है, वहीं दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही जो शासन एवं प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है। शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अधिकारी कर्मचारियों पर दबाब बनने के लिए निर्देश प्रसारित कर रहे है।