राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में मिले 54 करोड़ रुपये, फिर भी कम नहीं हो सका प्रदूषण

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम संस्था को दो चरणों में 54.25 करोड़ रुपये दिया गया था। लेकिन देश के प्रदूषित शहरों में औद्योगिक नगरी के प्रदूषण को सुधारने के लिए कोई ठोस योजना का संचालन नहीं किया गया।
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राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम संस्था को दो चरणों में 54.25 करोड़ रुपये दिया गया था। लेकिन देश के प्रदूषित शहरों में औद्योगिक नगरी के प्रदूषण को सुधारने के लिए कोई ठोस योजना का संचालन नहीं किया गया। यही वजह है की स्थिति आज तक नहीं सुधर पायी। आज भी पहले की ही तरह जगह जगह धूल उड़ती हुई दिखायी दे रही है। इसी प्रकार नालियों की सफ़ाई के लिए भी नगर निगम ने करोड़ों खर्च किए फिर भी नालों का वही हाल दिख रहा है। खबरों के मुताबिक़ नगर निगम के पास बजट की कोई कमी नहीं है लेकिन अधिकारियों के ऐसे काम के कारण बेहतर परिणाम नहीं मिल रहे।

दो चरणों में मिला था बजट 
नगर निगम को बजट दो चरणों में मिले थे।इसमें पहले चरण में वर्ष 2020-21 में 48 करोड़ रुपये तथा दूसरे चरण में 6.25 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। अर्थात् 54.25 करोड़ नगर निगम को मिलने के बाद भी प्रदूषण के वही हालत हैं। इसमें 30.25 करोड़ रुपये वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए तथा 24 करोड़ रुपये पेयजल एवं सैनिटेशन के लिए दिये गये थे। 

नालियों के पानी में ही बह गये 4 करोड़ 
नगर निगम ने दिसंबर महीने में नालियों की सफ़ाई पर ही लगभग 4 करोड़ से ज़्यादा रुपये खर्च हो गये। उसी माह में लोगों को याद है ना कार्यक्रम के तहत जागरूकता अभियान चलाया गया था। इस दौरान नाले नालियों की सफ़ाई के कम में पैसे लग गये थे। कुछ दिनों तक तो हाल ठीक था लेकिन वर्तमान में इन नालों का बहुत बुरा हाल हो चुका है। इन बजट का कोई परिणाम नहीं निकला। 

नगर निगम ने दो एंटी स्मॉग गन ख़रीदी
नगर निगम ने पिछले साल विधानसभा के क्षेत्रों में छिड़काव के लिये 96 लाख रुपये की दो एंटी स्मॉग गन ख़रीदी थी। वहीं अब नगर निगम तीन और स्मॉग गन की ख़रीदारी के बारे में सोच रहा है। इसी प्रकार वर्ष 2021-22 में 94 लाख रुपये के टैंकर ख़रीदे गये थे। अब सड़कों पर छिड़काव के लिये 12 लाख के और टैंकर ख़रीदे जायेग।

नगर निगम के पूर्व मुख्य अभियंता एनके कटारा ने कहा कि नालों की अच्छे से सफ़ाई होनी चाहिये। वाहनों के धुएँ से प्रदूषण बढ़ता है। इन पर रोक लगनी चाहिये। इसी प्रकार जिन क्षेत्रों में धूल उड़ती है। वहाँ पानी का छिड़काव भी होना चाहिए। बहुत से लोग कचरा और पॉलीथिन जला देते हैं यह भी एक प्रदूषण का करण है। ऐसे मामलो पर नगर निगम सख़्त से सख़्त कार्यवाई करे। प्रदूषण के नियंत्रण के लिये नगर निगम की निगरानी में कमेटी बनाई जानी चाहिये। जो रोज़ प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्य करने चाहिए। जिससे यह पता चल पायेगा की कितना सुधार हो पा रहा है।