देवउठनी एकादशी के बाद भी अभी सात फेरों के लिए करना पड़ेगा इंतजार, शुक्र बन रहा बड़ा कारण

19  दिन अभी भी नहीं हो सकेंगे विवाह समारोह
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Will have to wait now for marriage

माना जाता है कि देवउठनी एकादशी पर देवता जाग जाते हैं और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। लेकिन इस वर्ष देवउठनी एकादशी के बाद भी विवाह समारोह नहीं हो सकेंगे। सात फेरों के लिए अभी 19 दिन का और इंतजार करना पड़ेगा। ज्योतिषियों के अनुसार 23  नवंबर तक शुक्र अस्त होने के कारण विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। 

क्या कहते हैं ज्योतिर्विद
ज्योतिर्विद बताते हैं कि जव देव भगवान् श्रीविष्णु चार माह के लिये शयन करते हैं तो मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है और जव देव उठ जाते हैं तो मागंलिक कार्य भी आरम्भ हो जाते हैं।  देवउठनी एकादशी के दिन विवाह की परम्परा पौराणिक काल से रही है। देवशयनी एकादशी 10 जुलाई से देव प्रबोधनी 4 नवंबर तक अर्थात 119 दिन पर्यंत चातुर्मास पूर्ण होने के उपरान्त तुलसी व शालिग्राम के विवाह के साथ ही विवाह एवं अन्य समस्त मंगल कार्यों के शास्त्र सम्मत मुहूर्त प्रारंभ हो जाते हैं। परन्तु 2 अक्टूबर से 23 नवम्वर तक शुक्र अस्त होने के कारण मांगलिक परिणय उत्सव के लिए अभी और प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। इसके अलावा नव युगलों को वर्ष 2022 के माह नवंबर व दिसंबर में बहुत ही कम वैवाहिक मुहूर्तों के कारण कुछ निराश होना पड़ेगा। 

19 दिन करना होगा इंतजार
विवाह आदि शुभ मुहूर्त में शुक्र ग्रह की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि विवाह का कारक ग्रह शुक्र को माना गया है। यदि किन्हीं परिस्थितियों में शुक्र अस्त हो जाते हैं अथवा तारा डूब जाता है तो ऐसी स्थिति में विवाह के लायक मुहूर्त नहीं बन पाते हैं। विगत 2 अक्टूबर से शुक्र अस्त चल रहे हैं और यदि सर्वमत की बात करें तो 23 नवंबर को ही शुक्र उदय हो पाएंगे और इसके पश्चात विवाह योग मुहूर्त भी खुल जाएंगे। इस प्रकार 5 नवंबर को तुलसी विवाह के बाद भी लोगों को १९ दिन और इंतजार करना पड़ेगा।

नवंबर व दिसंबर में केवल आठ मुहूर्त
बताया गया है कि शुक्र उदय होने के पश्चात नवंबर में केवल 4 शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें विवाह कर्म हो सकेंगे। इनमें से 24, 25, 27 व 28 नवंबर को शुभ लग्न हैं। इसी प्रकार दिसंबर माह में भी विवाह के शुभ मुहूर्त केवल चार बन रहे हैं। जिनमें से 2, 7, 8 व 9 दिसंबर को शुभ लग्न होंगी। इसके पश्चात दिसंबर माह में सूर्यनारायण अपने गुरु बृहस्पति देव के घर धनु राशि में चले जाएंगे, और खरमास प्रारंभ हो जाएगा। और फिर 1 माह के लिए फिर विवाह मुहूर्त पर विराम लग जाएगा। इसके पश्चात 14 जनवरी मकर संक्रांति के बाद ही विवाह इत्यादि मंगल कार्यहो सकेंगे।