तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान करने कि क्या है वजह? जानिए कब और कैसे शुरू हुई यह परंपरा

बाल दान करने वाले भक्तों पर भगवान वेंकटेश्वर की कृपा बनी रहती है.
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आंध्र प्रदेश तिरुपति बालाजी मंदिर

भारत में आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध और आकर्षक मंदिर है. इस मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करते हैं. आपने कई जगह पिक्चर फोटोस आदि में देखा होगा कि लोग यहां पर आते हैं और अपने बालों का दान करते हैं. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि बच्चे बड़ों से लेकर महिलाएं तक यहां बाल दान करती है. आप सभी के मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि आखिर तिरुपति मंदिर में बाल दान क्यों किए जाते हैं? तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताते हैं.

तिरुपति बालाजी में अपने बालों को दान करके लोग अपनी बुराइयां और पापों को यही छोड़ जाते हैं. इतना ही नहीं यहां सारे भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी होती है. ऐसा माना जाता है कि जो वक्त अपने बाल यहां दान करते हैं उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है. बता दें कि यहां करीब 20000 से ज्यादा लोग 1 दिन में बाल दान करते हैं.

महिलाओं के बाल दान करने के पीछे की वजह यह है कि ऐसा माना जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर नीलाद्रिपर्वत पर सो रहे थे तभी वहां पर देवी नीलाद्रि पहुंची और भगवान वेंकटेश्वर को निहारने लगी. नीलाद्रि देवी ने देखा की भगवान के सिर पर एक धब्बा था जो उनकी सुंदरता प्रभावित कर रहा था. तभी उन्होंने अपने बालों को खींचकर भगवान के सिर पर रख दिया ताकि उनकी सुंदरता को पूरा किया जा सकें. भगवान वेंकटेश्वर ने देखा की नीलाद्रि के सिर से खून निकल रहा है तभी उन्होंने नीलाद्री देवी को बाल वापस दिये लेकिन उन्होंने बाल वापस नहीं लिये. देवी नीलाद्रि ने कहा कि भविष्य में जो भी भक्त बाल दान करेगा उसे पापों से मुक्ति मिलेगी. 

बाल दान से जुड़ी एक और कहानी है कि भगवान की विग्रह पर चींटियों का पहाड़ बन गया था. एक गाय यहां पर दूध देने के लिए जाती थी. यह देखकर गाय के मालिक ने गाय को गुस्से में कुल्हाड़ी मारकर सिर पर वार किया. इस वार से बालाजी घायल हो गए और उनके कुछ बाल भी गिर गए. तभी नीला देवी ने अपने बाल काटकर बालाजी के घाव पर लगाएं. नीला देवी के केश से बालाजी का घाव ठीक हो गया. नारायण भगवान ने कहा की बाल शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ऐसे में वह बालों के दान को देखकर खुश हो गए. तभी से यह मान्यता है कि बाल दान करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती है.